गीत ग़ज़ल -भोजपुरिया
जे दिल से निकले ला दिल ले जाला उ मन के भाषा ह भोजपूरी
सभे के नियरे लियाए वाला मिलन के भाषा ह भोजपूरी
इ शब्द नाहीं सरूर हउवे इ दिल के दुनिया के नूर हउवे
जे प्रेम में बा ओ प्रेमियन के नयन के भाषा ह भोजपूरी
सुनीं जी माई त ठीक बाड़ी मगर बबुनिया बोलाव तीया
विरह सनेशा लिखे के इहे सजन के भाषा ह भोजपूरी
जे प्रेम खातिर अकेले वन में धनुष उठा के भटक गइल बा
ओ राम जी के बोलाये वाला हिरन के भाषा ह भोजपूरी
इहे भिखारी के तान हउवे इहे हमन के परान हउवे
इहे ह मीरा के दर्द ई हे किसन के भाषा ह भोजपूरी
कबो ह फगुवा कबो ह चइता कबो ई बिरहा के धुन नियर बा
बदन के भाषा चलन के भाषा भजन के भाषा ह भोजपूरी
जुलम के आगे सवाल बन के लड़ाई ल ड़े के हौसला ह
अजाद होखला के आस के हर किरन के भाषा ह भोजपूरी
ए बाबू कौने जिला से हउ व विदेश में जब इ केहू पूछे
तबे अचानक से याद आला वतन के भाषा ह भोजपूरी
जहां नदी के हर एगो तट पर निवास करेली छठी माई
परम्परा के ओ देश में ही हमन के भाषा ह भोजपूरी
राजीव कुमार
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