Tuesday, December 19, 2023

जे दिल से निकले ला दिल ले जाला उ मन के भाषा ह भोजपूरी

गीत ग़ज़ल -भोजपुरिया

जे दिल से निकले ला दिल ले जाला उ मन के भाषा ह भोजपूरी
सभे के नियरे   लियाए वाला  मिलन के भाषा  ह भोजपूरी 

इ शब्द नाहीं  सरूर हउवे  इ दिल के दुनिया के नूर हउवे
जे प्रेम में बा  ओ प्रेमियन के  नयन के भाषा ह भोजपूरी

सुनीं जी माई त ठीक बाड़ी मगर बबुनिया बोलाव तीया
विरह सनेशा  लिखे के इहे  सजन के भाषा ह भोजपूरी

जे प्रेम खातिर अकेले वन में धनुष उठा के भटक गइल बा
ओ राम जी के बोलाये वाला हिरन के भाषा ह भोजपूरी

इहे भिखारी   के तान हउवे    इहे हमन   के परान हउवे
इहे ह मीरा   के दर्द ई हे  किसन के भाषा   ह भोजपूरी

कबो ह फगुवा कबो ह चइता कबो ई बिरहा के धुन नियर बा
बदन के भाषा चलन के भाषा भजन के भाषा ह भोजपूरी

जुलम के आगे सवाल बन के लड़ाई ल ड़े के हौसला ह
अजाद होखला के आस के हर किरन के भाषा ह भोजपूरी

ए बाबू कौने  जिला से हउ व  विदेश में जब  इ केहू पूछे
तबे अचानक  से याद आला  वतन के भाषा ह भोजपूरी

जहां नदी के  हर एगो तट पर  निवास करेली छठी माई 
परम्परा के  ओ देश में ही   हमन के भाषा   ह भोजपूरी

राजीव कुमार

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