ले डूबा ग़ज़ल
ऐसा लगता था बचा लेगा मगर ले डूबा।
घर बचाते हुए इक शख्स शहर ले डूबा।
फिर वही रेट वही लोन वो गिरते शेयर ।
मेरे पैसों को इसी बात का डर ले डूबा।
आपको चाहते रहने के सुकूं को साहब।
आप से दूर हो जाने का असर ले डूबा ।
आज सूरज ने शरारत भी कुछ ऐसे की।
सुब्ह उगते ही सितारों का क़मर ले डूबा।
इस हकीकत को कोई कैसे छुपा सकता है ।
जिसका फल खाया वही पेड़ बश़र ले डूबा
एक मंज़िल जिसे पाने की हसीं ख़्वाहिश में
इक अडानी को अडानी का सफ़र ले डूबा
राजीव कुमार
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