Sunday, February 8, 2026

नहीं है ग़म कि मैं असफल रहा हूं

ग़ज़ल 

नहीं है ग़म कि मैं असफल रहा हूं 
मगर हर हाल में अड़ियल रहा हूं

जो मरते-मरते फिर से जी उठा है
कभी इस तौर भी घायल रहा हूं 

मेरी गगरी में गंगा जल है लेकिन
किसी के इश्क में मैं जल रहा हूं

तेरी चाहत के कांवड़ को उठा कर
मैं इक अरसे से पैदल चल रहा हूं

मैं अपने दिल की सुनता हूं हमेशा 
तभी दुनिया को शायद खल रहा हूं

जिसे भगवान कहता है ज़माना 
मैं उसके साथ पोलिटिकल रहा हूं

राजीव कुमार

कोई बिजनेस तो अच्छे से निभाओ।

ग़ज़ल 
कोई बिजनेस तो अच्छे से निभाओ।
ख़ुदा से तुम भी थोड़ा खौफ खाओ

मैं हंसते हंसते सब कुछ मान लुंगा
महब्बत पर न यूं टैरिफ लगाओ ।

मुझे दे कर दगा क्या खुश रहोगे ।
कदम ये सोच कर अपना बढ़ाओ

वो दिन भी याद आयेंगे तुम्हें जब
गले से तुम ही कहते थे लगाओ

हमें हर रोज रुस्वा कर रहे हो।
हमारा जुर्म क्या है ये बताओ।

मेरी चुप्पी पे दुनिया हंस रही है
मेरी दुनिया में फिर से लौट आओ

राजीव कुमार

बाजार हमारा उठेगा भूतनी के ट्रम्प

ग़ज़ल 
बाजार हमारा उठेगा भूतनी के ट्रम्प
देखेंगे तू भी क्या करेगा भूतनी के ट्रम्प।

हम प्लेन कार ट्रेन यहीं पर बनायेंगे।
तू सिर्फ बोलता रहेगा भूतनी के ट्रम्प

ईरान रूस फ्रांस अरब हर किसी से अब
व्यापार हमारा चलेगा भूतनी के ट्रम्प

बिजली खदान रोड दवा सब है देश में।
ये देश फूलेगा फलेगा भूतनी के ट्रम्प 

भरपूर गेहूं दाल दूध है हमारे पास 
तेरा न कुछ यहां बिकेगा भूतनी के ट्रम्प

तेरा गूरूर तेरी अकड़ तेरी धमकियां।
कोई नहीं यहां डरेगा भूतनी के ट्रम्प 

टैरिफ बढ़ाले चाहे तू जुर्माने लाद दे
भारत कभी नहीं झुकेगा भूतनी के ट्रम्प

राजीव कुमार

शेर जंगल का जब से बेदम है

ग़ज़ल 
शेर जंगल का जब से बेदम है
गीदड़ों की तभी से बम बम है

बंदरों को फकत यही गम है
एक गदहा यहां का रुस्तम है

गोरे कालों के देख कर झगड़े 
जेब्रा हंसते हंसते बेदम है

घांस घोड़ों को मिल नहीं पायी
और गदहों के मुह में चम चम है

आई सी सी है खेल शाहों का
अपने खातिर तो सिर्फ कैरम है

जिसको सब बादशाह समझते हैं 
वो रईशों की चांद बेगम है

हम भी ऐसे हिरन हैं जंगल के
जिसके हर इक कदम पे जोखम है

हर शिकारी का एम है हम पर
हमने जब से उठाया परचम है

इश्क़ के हक में बोलने वाला
 या तो गांधी है या तो गौतम है

राजीव कुमार

खराब सोच बा जेकर ऊ दिल से हट जाई

भोजपुरी ग़ज़ल 
खराब सोच बा जेकर ऊ दिल से हट जाई
हिया में प्रेम बा जेकरे उहे निकट जाई।

हर एगो लोर में हमनी के दुख सिमट जाई
जहां ले बात बा ज़िनगी के ऊ त कट जाई

जे हमरे हार प खुश बा ऊ ई भुलाइल बा
इ हार जीत में देखते देखअत पलट जाई

एही सवाल पर टूटल देवाल आंगन के  
जे सबके जोड़ के रखलस ऊ कइसे बट जाई

ए राजनीत में उहे चली जे मौका पर 
केहु के छोड़ के केहू से जा के सट जाई

तोहार इश्क के तब्बो करी जमाना याद
तोहार काम ए धरती से जब निपट जाई

राजीव कुमार

सब कुछ तो पा चुका हूं तुम्हारे बगैर भी

ग़ज़ल

सब कुछ तो पा चुका हूं तुम्हारे बगैर भी
हारा हुआ हूं फिर भी मैं हारे बगैर भी

लोगों में और उसमें यही फर्क है कि वो 
सुनता है मेरा नाम पुकारे बगैर भी

घरबार तोड़ देने की तरकीब अस्ल में 
लोगो को मार देना है मारे बगैर भी

माना कोई भी तुम सा जमीं पर नहीं मगर
मैं खुश हूं इस जमीं पे तुम्हारे बगैर भी

सबके लिए खुदा है मगर उनका क्या करें
जो लोग जी रहे हैं सहारे बगैर भी

दुनिया तो जीत सकते हैं पर जानते हैं हम
दुनिया थी और रहेगी हमारे बगैर भी

इतना हूं जल्दबाज कि दफ्तर कभी कभी
जाता हूं अपने बाल संवारे बगैर भी

मैं खुश हूं कामयाब हूं पर मसअला ये है
रातें गुजर रहीं हैं गुजारे बगैर भी

राजीव कुमार

जितने लोग हो उतने किस्से होते है

जितने लोग हो उतने किस्से होते है
दिल के रिस्ते दिल के रिस्ते होते हैं

सीधे सच्चे प्यारे अच्छे होते है
अपने बैच के लड़के अपने होते है

जिस दुनिया से हम हैं उसमें सबके सब 
थोड़ी पगली थोड़े पगले होते हैं

पहली बार जो कोंट्री कर दारू पी थी
तब जाना था ठेके अच्छे होते है

बब्बल भाई से मिलके तारा कहता था
राजिव पेपर कितने हल्के होते हें

कुछ लड़के स्मार्ट थे लेकिन सिंगल थे
मोनू भाई पाप पुराने भी जन्मों के होते हैं

डीन काल करवाया पर ये भूल गयी
डीन भी तो हम जैसे लड़के होते है

दिन भर सीसी बीसी राते मोबाइल पर
जावेद जैसे लड़के विरले होते हैं

खूब गये लाइब्रेरी तब ये ज्ञान हुआ
यारों बच्चे दो ही अच्छे होते हैं 

लड़कियाँ जैसी थीं वैसी हैं लेकिन
लड़के साले जल्दी बुढ्ढे होते हैं

चेहरे इक दिन वही चमकते हैं यारों
जिनकी आंख में लाखों सपने होते है

सालों बाद मिले तब हम भी जान गये
लोग जहाँ में कितने प्यारे होते हैं 

जितने लोग हो उतने किस्से होते है
दिल के रिस्ते दिल के रिस्ते होते हैं

Saturday, August 16, 2025

जो अच्छा था वो पापी हो गया है

जो अच्छा था वो पापी हो गया है।
हर इक बंदा फसादी हो गया है।

तुम्हारा लव है होली काउ लेकिन 
हमारा लव जेहादी हो गया है

खुली है जब से सारी पोल पट्टी
सभी का खून पानी हो गया है

वो घर रहते थे अस्सी लोग जिसमें 
इलेक्शन बाद खाली हो गया है

हकीकत सामने आते ही देखो
भगोना भी कटोरी हो गया है

यकीं तुम पर कोई अब क्युं करेगा
यहां हर एक बागी हो गया है

जिसे डेमोक्रेसी कहती है दुनिया 
अब उसका जिस्म मिट्टी हो गया है

मेरे सरकार दुल्हे बन गये हैं 
कभीशन उनकी घोड़ी हो गया है

कहां इसकी रपट जा कर लिखायें
हमारा वोट चोरी हो गया है

रविश कुमार

Monday, March 31, 2025

राजा के राज छोर के रानी बदल गइल

राजा के राज छोर के रानी बदल गइल 
जनता से माल लेके अडानी बदल गइल

जब से लहू से आंख के पानी बदल गइल 
हमनी के जिन्दगी के कहानी बदल गइल 

रोटी पढ़ाई अउर कमाई के चाह में।
चलत चलत सड़क प जवानी बदल गइल

हालत शहर आ गांव के बदलल नाही त का?
सड़कन के नाम देख ल जानी बदल गइल

स्नेह प्रेम प्यार के जगही पे मार काट 
हर ओर अब विकास के मानी बदल गइल

साधू महंत देख के अब ले हरान बा 
मिल के एगो फकीर से दानी बदल गइल

राजीव कुमार

Saturday, December 14, 2024

कहां चलता है कोई आस्था पर

नयी ग़ज़ल 

कहां चलता है कोई आस्था पर 
सभी कायम हैं अपनी धूर्तता पर 

मैं अपना घर भी इक दिन खोदता पर
हसीं आती है ऐसी मूर्खता पर

ज़मीं में दफ्न है जो इक सदी से
किसे विश्वास है उस देवता पर

अदालत है या है तलवार कोई 
जो लटकी है हमारी एकता पर

हमारा घर उजाड़ा जा रहा है 
कोई ये क्युं नहीं है सोचता पर

नई नस्लें जो उड़ना चाहती हैं
इन्हीं का क्युं कोई है काटता पर

गली कूचे लहू से सन गये हैं 
मगर है जश्न यारों रेख़्ता पर 

राजीव कुमार
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दू पसली के देह बा लेकिन सभनी के हड़काये ला

नई भोजपुरी हास्य ग़ज़ल ❤️

दू पसली के देह बा लेकिन सभनी के हड़काये ला  
ए दुनिया के केतना पागल शायर लोग बनाये ला

मंच प चढ़ के बेमतलब के नारा खूब लगाये ला
गदहा नीयर रेंक-रेंक के शेर प गीत सुनाये ला

देख कवित्री जी के शायर श्रोता गण बउराये ला 
मीटर बहर लहर से बेसी मेकअप आग लगाये ला

फेल बा जे इतिहास में उहे मंदिर अकबर बाबर पर 
वीर रस के नाम प खाली लबराई बतियाये ला

फूहड़-फूहड़ जोक सुना के खुश बा हास्य कवि बाकिर
ए लोगन के सुन के श्रोता आंसू बहुत बहाये ला

प्रेम के शायर चांद सितार जुल्फ हुस्न के फेरा में 
अपने घरे मेहरारू से बड़का मार पिटाये ला

शहर में केहू पुछते नइखे तब्बो शायर अपना के 
मंच प चढ़ के जौन एलिया के मउसा बतलाये ला

राजीव कुमार

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Tuesday, November 12, 2024

कहीं खंजर कहीं पत्थर रहा है

ग़ज़ल 

कहीं खंजर कहीं पत्थर रहा है 
महब्बत का यही मंजर रहा है

जहां के कायदों से डर रहा है 
मेरे भीतर का शायर मर रहा है

 उसे दुनिया समझ आयेगी कैसे
जो बंदा सिर्फ अपने घर रहा है

 ज़मीं पर क़ैद हैं सारे परिंदे 
 वो जिनका घर कभी अम्बर रहा है

 उसी से हो गया है इश्क़ मुझको
मुकाबिल जो मेरे अक्सर रहा है

 नहीं पापा रहे पर है सकूं ये
मेरे सर पर भी इक छप्पर रहा है

 वही साधू है अब इस दौर में जो
पुराने दौर में अजगर रहा है

सितम दिल पर हमारे करने वालों 
ये फ्लावर भी कभी फायर रहा है

राजीव कुमार

नाकामियों का दौर बदलने का मज़ा देख

आज की ग़ज़ल 

नाकामियों का दौर बदलने का मज़ा देख 
आंखों में किसी ख्वाब के पलने का मज़ा देख

पैरों से लहू अपने निकलने का मज़ा देखा 
कांटों से भरी राह पे चलने का मज़ा देख

दुनिया तो गिराती है गिरा देगी मगर यार
तू गिर गया तो गिर के सम्भलने का मज़ा देख

ये दीन धरम जात अना चोंचले हैं सब
इन सब को किसी रोज कुचलने का मज़ा देख

किस किस को मिटायेगा भला किससे लड़ेगा
तू जंग नहीं जंग के टलने का मज़ा देख

परवाने का शम्मा की महब्बत में नहीं यार
तू खुद किसी के इश्क़ में जलने का मज़ा देख

सागर के किसी छोर पे सूरज को मेरी जान 
बाहों में मेरी बैठ के ढलने का मज़ा देख

राजीव कुमार

प्रेम में पर के ई बुझाइल बा

भोजपुरी ग़ज़ल 

प्रेम में पर के ई बुझाइल बा 
दिल प केतना वजन धराइल बा

कबले रोकी पहाड़ा दरिया के 
लोर रोकला से कब रोकाइल बा

नेह, वादा आ बेवफाई के
सबके नटई में दुख बन्हाइल बा

शेर बनेला नवका प्रेमी लोग
जे पुरनिया बा ऊ डेराइल बा

दिल के दुनिया अजोर जे कइलस
उहे दियवे त अब बुताइल बा

चांद का, चांदनी का, का सूरज
उनके चेहरा में सब समाइल बा

सपना आंखी में जिनके बा उनके
नींद अच्छा से कहिया आइल बा

जेकरे खातिर बहार नइखे ऊ
फूल पतझड़ में कब फुलाइल बा 

साथ छुटला प टूट जाला लोग
हर काहानी में ई लिखाइल बा

राजीव कुमार

मुझ पर यकींन कर लें मुझे मान जायें सब

ग़ज़ल 

मुझ पर यकींन कर लें मुझे मान जायें सब 
इस बार मुझे ठीक से पहचान जायें सब

ऐसा भी नहीं है कि कोई राज हूं गहरा
ऐसा भी नहीं है कि मुझे जान जायें सब

उल्फ़त तजुर्बेकार के बस का सफर नहीं 
इस रास्ते पे जायें तो नादान जायें सब

वो जा रहे थे और मैं ये सोच रहा था।
काबा ए आशिकी से ये कुफरान जायें सब

कालेज पढ़ाई नौकरी शादी सब आम हैं 
वो काम हो जो देख के हैरान जायें सब

मुश्किल पसंद हैं जो वही लोग बस रुकें 
महफ़िल में जितने लोग हैं आसान जायें सब

घर में हो चाहे ज़हन में नाकाबिले पसंद
कूड़े में ऐसे फालतू सामान जायें सब

ये शह्र आप का है रहे आप का मगर 
जंगल से अब हमारे भी इंसान जायें सब

राजीव कुमार

कब चैन तनी मिलल दिल सच में हसल कहिया

भोजपुरी ग़ज़ल 

कब चैन तनी मिलल दिल सच में हसल कहिया 
हमनी के जिनिगिया में हमनी के चलल कहिया

ए प्रेम के पिजड़ा में जब क़ैद भइल पंछी 
का जाने जियल कहिया का जाने मरल कहिया

नवका से पुरनका ले हर जुग में जुलम भइल।
पर प्यार करे वाला केहू से डरल कहिया

बेटी के विदाई जे कइले बा उहे जानी
फुलवार अंगनवा के बिगड़ल आ बनल कहिया

इज्ज़त जे कमवलस ऊ मरियो के अमर बाटे
बाकिर ए जमाना में धनवान बचल कहिया

दुसरा के मुसीबत में अब केहू जुड़त नइखे  
इंसान ए दुनिया में इंसान रहल कहिया

पहिले से महब्बत पर पहरा बा जयादा अब ।
पर प्रेम के ई नदिया पर्वत से रुकल कहिया

राजीव कुमार

Wednesday, May 15, 2024

ये जख्म फिर कुरेदिये

ये जख्म फिर कुरेदिये 
ये दर्द फिर बड़ाईये 
मगर हमारे पास फिर से
लौट कर तो आइये
वफा के नाम के हसीन 
ख्वाब चाहे तोड़िये 
कसम है आप को हमें 
न यू अकेला छोड़ीये

कली कली बहार है 
फजा भी मुश्क बार है 
बहुत हसीन है चमन 
के पुर सूकूं बयार है 
मगर नजर में हर घड़ी
तुम्हारा इन्तज़ार है 
यही करारे दिल है तो
इसी का नाम प्यार है

है जी में छोड़ दूं जहां 
बुला रहा है आसमां
भटक गया हूं इस कदर
पता नहीं मैं हूं कहां
मेरे शह्र में अब मेरा 
न घर है ना ही आशियां 
किसे बताऊं गम मेरा
किसे सुनाऊं दास्तां

तुम्ही सम्भालो दीन अब
हमें नहीं यकीन अब
मैं था बहुत मतीन पर 
नहीं रहा मतीन अब 
खिसक चुकी है पांव से 
हमारे भी जमीन अब
जो तुम नहीं तो जीस्त में 
कहां कोई है सीन अब

राजीव कुमार

Sunday, January 21, 2024

भोजपुरी गीत वैकुंठ में श्रीराम

वैकुंठ में एक दिन राम जी से 
लक्षमण जी पूछ रहल बानी
का बात बा सोच रहल बानी
काहे गुमशुम बइठल बानी 

वनवास हमन के कट गइल 
हमनी के काम निपट गइल
हर एक बुराई मर गइल 
रावण के लंका जर गइल 
बाली के बाजा बाज गइल 
सुग्रीव के माथे ताज गइल
अन्याय से मुक्ति मिल गइल 
लव कुश के गद्दी मिल गइल 
अब नर बानर में एका बा 
हर ओर राम के रेखा बा
हर ऋषि मुनि में शक्ति बा 
हर ओर आप के भक्ति बा 
तब्बो चुप बइठ गइल बानी 
का बात बा सोच रहल बानी

ई सुन के थोड़ी देर के बाद 
धरती प्रभु राम के आइल याद
ए लखन जहां पर युद्ध भइल
उंहवा न भइल के हू आबाद

हर युद्ध में जीत पूरूष जाला 
हर युद्ध में औरत हारे ले 
हमनी के जब वनवास भइल
तब दे ख का संत्रास भइल 
सम्मान बाप के जीत गइल
माई के ममता हार गइल
तू प्रेम भाई के जित ल पर
तहके उर्मिला हार गइल
आ भरत खड़ाऊ जीत गइल
त भरत के माई हार गइल

वनवास में आइल किष्किन्धा
उ बात अभी ले दिल में बा 
बाली सुग्रीव के झगड़ा से
बाली के तीर से मरला‌ से
केहू के आखिर का मीलल
बेवा तारा के होखला से
सुग्रीव के जीत त मिल गइल
पर तारा सब कुछ हार गइल
ए लखन बता द झगड़ा से 
कहंवा सबके उद्धार भइल

लंका के युद्ध में का भइल
के जीत गइल के हार गइल
इस सच सुलोचना से पू छ
पू छ लंका के रानी से
 जे कर परिवार उजर गइल
 ओकरे परिवार के स्वामी से 

कुछ देर के जीत के सुख होला 
पर हार के हर दम दुख होला 
हम सोच रहल बानी इ बात
का हाल होई ओ माई के 
जेकर हर लइका मर गइल
का हाल होई ओ पत्नी के 
जेकर सिंदूर उजर गइल 
केतना निर्दोष जवानन के
घर में मनहूसी पसर गइल
बेटी के शादी बाकी बा
लइका के पढ़ाई बाकी बा 
रावण से युद्ध खतम भइल 
जिनगी के लडा़ई बाकी बा

वैकुंठ में एक दिन राम जी से 
लक्षमण जी पूछ रहल बानी
का बात बा सोच रहल बानी
काहे गुमशुम बइठल बानी

Wednesday, January 17, 2024

वही सी एम वही पी एम वही हैं सी जे आई भी

नये साल की शुभकामना ग़ज़ल 🙂🥰❤️

वही सी एम वही पी एम वही हैं सी जे आई भी
विधायक भी वही हैं और विधायक जी का भाई भी

वही एम पी वही डी एम कमिश्नर भी वही सब हैं
वही सी ई सी हैं अपने वही है सी बी आई भी 

वही गढ़वाल है अपना वही अपना कुमाऊं है 
वही अपने पहाड़ी हैं वही अपनी तराई भी

वही लफड़े वही झगड़े वही हिंदू वही मुस्लिम 
वही थाना‌ पुलिस अपने वही कोरट लड़ाई भी 

वही खबरें‌ वही चैनल वही अखबार‌ वो ही हम
वही जनता वही बकरी वही यारों कसाई भी

वही दुनिया वही रस्में वही किस्से वही बातें 
सिलेंडर भी वही है और वही सब्जी कढ़ाई भी

वही गन्ना वही पानी वही मिल है वही चीनी
वही खेती वही मंडी वही अपनी कमाई भी

वही लड़की वही अशिक वही कानून वो ही जुर्म
वही पार्टी वही वर्कर खुदा वो ही खुदाई भी

किताबें भी वही होंगी वही स्कूत भी अपने
वही रोजी वही रोटी वही बिस्तर रजाई भी

वही पेट्रोल डीजल है वही आटा है चावल है
वही है दूध की कीमत वही अपनी दवाई भी

वही है नौकरी अपनी वही डीमांड भी घर की 
वही जोरु की किच किच है वही जोरु का भाई भी

नया ये साल है लेकिन नया कुछ भी नहीं इसमें
वही अपनी दुहाई है वही जग की बुराई भी

राजीव कुमार

एगो रानी आ राजा के कहानी ना अयोध्या ह

भोजपुरी ग़ज़ल में अयोध्या जी (साल के पहिला ग़ज़ल)

एगो रानी आ राजा के कहानी ना अयोध्या ह
खाली मंदिर शिवाला के कहानी ना अयोध्या ह

अयोध्या के कहानी खुद से लड़ के जग के जीतल ह
केहू से युद्ध लड़ला के कहानी ना अयोध्या ह

भुला के दुश्मनी सम्मान दुश्मन के दिहल जाला 
हमेशा तीर मरला के कहानी ना अयोध्या ह

केहू के प्रेम में शिव के धनुषवा तूरला के ह 
धनुष से मार देला के कहानी ना अयोध्या ह

एगो भाई के खातिर भाई आपन सब लुटा देला 
सिंहासन देला लेला के कहानी ना अयोध्या ह

भरत के सादगी बाटे त भक्ति बा विभीषण के
खाली लंका जरवला के कहानी ना अयोध्या ह

अहम रावण के लंका के कहानी ह जवन मूवल
बाकिर केहू के मरला के कहानी ना अयोध्या ह

एमें शबरी माई बाड़ी एमें केवट के भक्ती बा
इ खाली राम सीता के कहानी ना अयोध्या ह

ए में पर्वत गरुण बानर हिरन नदिया समंदर बा
ए बाबू बस अयोध्या के कहानी ना अयोध्या ह

समर्पण त्याग तप भक्ती भलाई प्रेम यारी ह 
लड़ाई द्वेष कइला के कहानी ना अयोध्या ह

राजीव कुमार

यूट्यूब चैनल का लिंक कमेंट बॉक्स में है उसे भी सब्सक्राइब करें 🙏

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...