Sunday, February 8, 2026

कोई बिजनेस तो अच्छे से निभाओ।

ग़ज़ल 
कोई बिजनेस तो अच्छे से निभाओ।
ख़ुदा से तुम भी थोड़ा खौफ खाओ

मैं हंसते हंसते सब कुछ मान लुंगा
महब्बत पर न यूं टैरिफ लगाओ ।

मुझे दे कर दगा क्या खुश रहोगे ।
कदम ये सोच कर अपना बढ़ाओ

वो दिन भी याद आयेंगे तुम्हें जब
गले से तुम ही कहते थे लगाओ

हमें हर रोज रुस्वा कर रहे हो।
हमारा जुर्म क्या है ये बताओ।

मेरी चुप्पी पे दुनिया हंस रही है
मेरी दुनिया में फिर से लौट आओ

राजीव कुमार

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