Sunday, February 8, 2026

जितने लोग हो उतने किस्से होते है

जितने लोग हो उतने किस्से होते है
दिल के रिस्ते दिल के रिस्ते होते हैं

सीधे सच्चे प्यारे अच्छे होते है
अपने बैच के लड़के अपने होते है

जिस दुनिया से हम हैं उसमें सबके सब 
थोड़ी पगली थोड़े पगले होते हैं

पहली बार जो कोंट्री कर दारू पी थी
तब जाना था ठेके अच्छे होते है

बब्बल भाई से मिलके तारा कहता था
राजिव पेपर कितने हल्के होते हें

कुछ लड़के स्मार्ट थे लेकिन सिंगल थे
मोनू भाई पाप पुराने भी जन्मों के होते हैं

डीन काल करवाया पर ये भूल गयी
डीन भी तो हम जैसे लड़के होते है

दिन भर सीसी बीसी राते मोबाइल पर
जावेद जैसे लड़के विरले होते हैं

खूब गये लाइब्रेरी तब ये ज्ञान हुआ
यारों बच्चे दो ही अच्छे होते हैं 

लड़कियाँ जैसी थीं वैसी हैं लेकिन
लड़के साले जल्दी बुढ्ढे होते हैं

चेहरे इक दिन वही चमकते हैं यारों
जिनकी आंख में लाखों सपने होते है

सालों बाद मिले तब हम भी जान गये
लोग जहाँ में कितने प्यारे होते हैं 

जितने लोग हो उतने किस्से होते है
दिल के रिस्ते दिल के रिस्ते होते हैं

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