Saturday, December 14, 2024

दू पसली के देह बा लेकिन सभनी के हड़काये ला

नई भोजपुरी हास्य ग़ज़ल ❤️

दू पसली के देह बा लेकिन सभनी के हड़काये ला  
ए दुनिया के केतना पागल शायर लोग बनाये ला

मंच प चढ़ के बेमतलब के नारा खूब लगाये ला
गदहा नीयर रेंक-रेंक के शेर प गीत सुनाये ला

देख कवित्री जी के शायर श्रोता गण बउराये ला 
मीटर बहर लहर से बेसी मेकअप आग लगाये ला

फेल बा जे इतिहास में उहे मंदिर अकबर बाबर पर 
वीर रस के नाम प खाली लबराई बतियाये ला

फूहड़-फूहड़ जोक सुना के खुश बा हास्य कवि बाकिर
ए लोगन के सुन के श्रोता आंसू बहुत बहाये ला

प्रेम के शायर चांद सितार जुल्फ हुस्न के फेरा में 
अपने घरे मेहरारू से बड़का मार पिटाये ला

शहर में केहू पुछते नइखे तब्बो शायर अपना के 
मंच प चढ़ के जौन एलिया के मउसा बतलाये ला

राजीव कुमार

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