भोजपुरी ग़ज़ल
प्रेम में पर के ई बुझाइल बा
दिल प केतना वजन धराइल बा
कबले रोकी पहाड़ा दरिया के
लोर रोकला से कब रोकाइल बा
नेह, वादा आ बेवफाई के
सबके नटई में दुख बन्हाइल बा
शेर बनेला नवका प्रेमी लोग
जे पुरनिया बा ऊ डेराइल बा
दिल के दुनिया अजोर जे कइलस
उहे दियवे त अब बुताइल बा
चांद का, चांदनी का, का सूरज
उनके चेहरा में सब समाइल बा
सपना आंखी में जिनके बा उनके
नींद अच्छा से कहिया आइल बा
जेकरे खातिर बहार नइखे ऊ
फूल पतझड़ में कब फुलाइल बा
साथ छुटला प टूट जाला लोग
हर काहानी में ई लिखाइल बा
राजीव कुमार
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