नाकामियों का दौर बदलने का मज़ा देख
आंखों में किसी ख्वाब के पलने का मज़ा देख
पैरों से लहू अपने निकलने का मज़ा देखा
कांटों से भरी राह पे चलने का मज़ा देख
दुनिया तो गिराती है गिरा देगी मगर यार
तू गिर गया तो गिर के सम्भलने का मज़ा देख
ये दीन धरम जात अना चोंचले हैं सब
इन सब को किसी रोज कुचलने का मज़ा देख
किस किस को मिटायेगा भला किससे लड़ेगा
तू जंग नहीं जंग के टलने का मज़ा देख
परवाने का शम्मा की महब्बत में नहीं यार
तू खुद किसी के इश्क़ में जलने का मज़ा देख
सागर के किसी छोर पे सूरज को मेरी जान
बाहों में मेरी बैठ के ढलने का मज़ा देख
राजीव कुमार
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