Tuesday, November 12, 2024

नाकामियों का दौर बदलने का मज़ा देख

आज की ग़ज़ल 

नाकामियों का दौर बदलने का मज़ा देख 
आंखों में किसी ख्वाब के पलने का मज़ा देख

पैरों से लहू अपने निकलने का मज़ा देखा 
कांटों से भरी राह पे चलने का मज़ा देख

दुनिया तो गिराती है गिरा देगी मगर यार
तू गिर गया तो गिर के सम्भलने का मज़ा देख

ये दीन धरम जात अना चोंचले हैं सब
इन सब को किसी रोज कुचलने का मज़ा देख

किस किस को मिटायेगा भला किससे लड़ेगा
तू जंग नहीं जंग के टलने का मज़ा देख

परवाने का शम्मा की महब्बत में नहीं यार
तू खुद किसी के इश्क़ में जलने का मज़ा देख

सागर के किसी छोर पे सूरज को मेरी जान 
बाहों में मेरी बैठ के ढलने का मज़ा देख

राजीव कुमार

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