खराब सोच बा जेकर ऊ दिल से हट जाई
हिया में प्रेम बा जेकरे उहे निकट जाई।
हर एगो लोर में हमनी के दुख सिमट जाई
जहां ले बात बा ज़िनगी के ऊ त कट जाई
जे हमरे हार प खुश बा ऊ ई भुलाइल बा
इ हार जीत में देखते देखअत पलट जाई
एही सवाल पर टूटल देवाल आंगन के
जे सबके जोड़ के रखलस ऊ कइसे बट जाई
ए राजनीत में उहे चली जे मौका पर
केहु के छोड़ के केहू से जा के सट जाई
तोहार इश्क के तब्बो करी जमाना याद
तोहार काम ए धरती से जब निपट जाई
राजीव कुमार
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