Sunday, December 3, 2023

आप अपनी खुशी के मारे हैं

ग़ज़ल 

आप अपनी खुशी के मारे हैं
और हम बे खुदी के मारे हैं

ये जो बुझते दिये हैं महफ़िल के
ये सभी  रौशनी के मारे हैं

उनकी आंखों में कुछ तो है जिसकी
हम भी  जादूगरी के मारे हैं

हम हैं दुनिया है और हम जैसे
लोग  यायावरी के मारे हैं

शह्र ए उल्फत में जाने वाले सुन
सब वहां जिंदगी के मारे हैं 

इश्क़ की प्यास मर गयी है या
आप सब तिश्नगी के मारे हैं

दिल की बातों की किसको फुर्सत है
सब के सब नौकरी के मारे हैं 

हमको मरने का डर नहीं हम तो
यार जिन्दादिली के मारे हैं

पहले उल्फत में जीते मरते थे
आज हम शायरी के मारे हैं

राजीव कुमार

मेरी बेटी को अदविका कहना

शब्द श्रद्धांजलि 🙏 इन्दिरा प्रियदर्शिनी गांधी जी 

मेरी बेटी को अदविका कहना 
मुझको लगता है इन्दिरा कहना 

ये मोहब्बत के हक में बोलेगी
ये अजीयत की जड़ को काटेगी
ये तो बेटी किसान की है सो
ये किसानों के हक में लिक्खेगी
अपनी मिट्टी को हौसला कहना 
मुझको लगता है इन्दिरा कहना

हर मसाइल का हल बनेगी ये 
मेरे बाजू का बल बनेगी ये
अपनी मेहनत से अपनी हिम्मत से
अपने भारत का कल बनेगी ये
ऐसी चाहत को इक दुआ कहना 
मुझको लगता है इन्दिरा कहना 

अपने सर को ये जब उठायेगी 
हर मुसीबत पे मुस्कुरायेगी 
मेरा नेहरू सा कद नहीं लेकिन 
मुझको नेहरू यही बनायेगी 
इससे ज्यादा अब और क्या कहना
मुझको लगता है इन्दिरा कहना 

राजीव कुमार

छठ पर्व गीत-भोजपुरी केहू रsहे न अबके दुखी छठी माई सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई

छठ पर्व गीत-भोजपुरी 

केहू रsहे न  अबके दुखी छठी माई 
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई 

बेटा माई से मीले पहुंच जाये घर
बेटियन के न लागे कहीं कौनो डर
प्रेम सबके हिया में पले रात दिन 
सsभे आगे से आगे बढ़े रात दिन 
प्रेम के दे द अइसन जड़ी छठी माई 
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई 

कौनो दुलहिन उदासी न पावे कबो 
माई के आंख ना डबबाये कबो 
माथे सेनुर रहे हाथे कंगन सजे 
सबके अरघा में चूड़ी के खनखन रहे
सब सुहागिन के कर द धनी छठी माई 
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई

गांव महके त चमकत बजरिया मिले
सबके बहंगी में फल मूल ठेकुआ मिले
खेत खलिहान अन धन से भरल रहे
भूखे केहू  ना दुनिया में परल रहे
 पूरा कर द हर एगो कमी छठी माई 
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई

डूबे सूरज त रंगीन हो इ गगन
साफ धरती रहे साफ रहे पवन 
इहे बा कामना की निरोगी हो तन
अब उम्मीदन से भरल रहे सबके मन
सूर्य डूबी तबे त उगी छठी माई 
सबके दउरा में भर द खुशी छठी माई

राजीव कुमार

हिस्से में मेरे गम की कटौती भी नहीं है

ग़ज़ल

हिस्से में मेरे गम की कटौती भी नहीं है
जीने की मगर मुझको चुनौती भी नहीं है

दिल को हमारे आप न किडनैप कीजीये
इतनी हमारे पास फिरौती भी नहीं है 

इक तरफा महब्बत को निभा पायेंगे कैसे 
गंगा के लिए दिल में कठौती भी नहीं है

उस शख़्स से उल्फत है उसे चाहते हैं पर 
मिल जाय वो हमको ये मनौती भी नहीं है।

जब चाहे कोई खेले कोई तोड़ दे इसको
दिल हुस्न के मालिक की बपौती भी नहीं है

बदमाश है मगरूर है दुश्मन है सकूं का
वो शख्स मगर इतना पनौती भी नहीं है

राजीव कुमार

ठोकर न काम आयी तो कांटे बिछा गये।

ग़ज़ल 

ठोकर न काम आयी तो कांटे बिछा गये।
उनको लगा कि रेस से हमको हटा गये।

रुकने लगे कदम तो उठी दिल से ये सदा 
कुछ दूर की ही बात है मंजिल पे आ गये

कुछ भी न अपने पास था इक जान छोड़कर 
फिर भी हमारे दोस्त हमें आजमा गये

जिनको न थी उम्मीद वो भी जायेंगे कभी
धरती से ऐसे-ऐसे बहुत देवता गये

इस दौर को जब लोग लिखेंगे तो लिखेंगे 
इस दौर में भी लोग थे जो सर कटा गये

जब तक बुलंद हौसला अपना है तब तलक 
क्या लेना क्या कमाया और क्या लुटा गये

अब पूछना ही होगा हमें ख़ुद से ये सवाल
इस अहद में हम लाए गए हैं कि आ गये

इक हम हैं जिसे चाहा उसे पा नहीं सके
इक वो हैं हमें छोड़ के हर चीज़ पा गये

राजीव कुमार

Monday, October 16, 2023

बेच के दर्द कुछ कमाये ला लोग





भोजपुरी ग़ज़ल

बेच के दर्द कुछ कमाये ला 
लोग मजमा इहां लगाये ला 

दुख के मतलब ऊ जान पाये ला
जे करेजा प चोट खाये ला।

भूल कइनीं जे प्रेम में पड़नी।
सभे आखिर में ई बताये ला।

जान देहला से काम ना होई
बा बहुत लोग दिल लगाये ला

चांद मासूम ह ई मत बूझिह 
धूप से रौशनी चोराये ला

बाद पतझड़ के हर बगइचा में
फूल हर‌ रंग के फुलाये ला 

उहे जीते ला इश्क के बाजी 
चोट खा के जे मुस्कुरायेला 

राजीव कुमार

Saturday, September 9, 2023

दुनिया त मिल गइल बा मगर दर नाहीं मिलल

भोजपुरी ग़ज़ल 

दुनिया त मिल गइल बा मगर दर नाहीं मिलल
घर छोड़ला के बाद कबो घर नाही मिलल

एक दोसरा के चाह में जिनकी कटल मगर 
दिल के जमीं से प्रेम के अम्बर नाहीं मिलल

रास्ता में कींच पांक कांट सब मिलल मगर 
मंजिल हमन के आज ले मनगर नाहीं मिलल 

शोहरत के आसमान लेके का करल जा ई 
जिनगी में जब सकून के सागर नाहीं मिलल

दुनिया में ओके रुउवां कइसे जोह लेम जी 
जे आप के ही आप के भीतर नाहीं मिलल 

मुश्किल बा जीत हमरा के तब्बो लड़े के बा 
मन में त ई ना आई कि अवसर नाहीं मिलल 

ई का जुलम ना ह कि रउंवा हमरे सामने 
रो रो के ई कहेनीं कि दिलबर नाहीं मिलल 

ताकत के दम पs प्रेम मिटा दे बs जहां से 
लागत बा तोहके प्रेम के जांगर नाहीं मिलल

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...