Saturday, August 16, 2025

जो अच्छा था वो पापी हो गया है

जो अच्छा था वो पापी हो गया है।
हर इक बंदा फसादी हो गया है।

तुम्हारा लव है होली काउ लेकिन 
हमारा लव जेहादी हो गया है

खुली है जब से सारी पोल पट्टी
सभी का खून पानी हो गया है

वो घर रहते थे अस्सी लोग जिसमें 
इलेक्शन बाद खाली हो गया है

हकीकत सामने आते ही देखो
भगोना भी कटोरी हो गया है

यकीं तुम पर कोई अब क्युं करेगा
यहां हर एक बागी हो गया है

जिसे डेमोक्रेसी कहती है दुनिया 
अब उसका जिस्म मिट्टी हो गया है

मेरे सरकार दुल्हे बन गये हैं 
कभीशन उनकी घोड़ी हो गया है

कहां इसकी रपट जा कर लिखायें
हमारा वोट चोरी हो गया है

रविश कुमार

Monday, March 31, 2025

राजा के राज छोर के रानी बदल गइल

राजा के राज छोर के रानी बदल गइल 
जनता से माल लेके अडानी बदल गइल

जब से लहू से आंख के पानी बदल गइल 
हमनी के जिन्दगी के कहानी बदल गइल 

रोटी पढ़ाई अउर कमाई के चाह में।
चलत चलत सड़क प जवानी बदल गइल

हालत शहर आ गांव के बदलल नाही त का?
सड़कन के नाम देख ल जानी बदल गइल

स्नेह प्रेम प्यार के जगही पे मार काट 
हर ओर अब विकास के मानी बदल गइल

साधू महंत देख के अब ले हरान बा 
मिल के एगो फकीर से दानी बदल गइल

राजीव कुमार

Saturday, December 14, 2024

कहां चलता है कोई आस्था पर

नयी ग़ज़ल 

कहां चलता है कोई आस्था पर 
सभी कायम हैं अपनी धूर्तता पर 

मैं अपना घर भी इक दिन खोदता पर
हसीं आती है ऐसी मूर्खता पर

ज़मीं में दफ्न है जो इक सदी से
किसे विश्वास है उस देवता पर

अदालत है या है तलवार कोई 
जो लटकी है हमारी एकता पर

हमारा घर उजाड़ा जा रहा है 
कोई ये क्युं नहीं है सोचता पर

नई नस्लें जो उड़ना चाहती हैं
इन्हीं का क्युं कोई है काटता पर

गली कूचे लहू से सन गये हैं 
मगर है जश्न यारों रेख़्ता पर 

राजीव कुमार
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दू पसली के देह बा लेकिन सभनी के हड़काये ला

नई भोजपुरी हास्य ग़ज़ल ❤️

दू पसली के देह बा लेकिन सभनी के हड़काये ला  
ए दुनिया के केतना पागल शायर लोग बनाये ला

मंच प चढ़ के बेमतलब के नारा खूब लगाये ला
गदहा नीयर रेंक-रेंक के शेर प गीत सुनाये ला

देख कवित्री जी के शायर श्रोता गण बउराये ला 
मीटर बहर लहर से बेसी मेकअप आग लगाये ला

फेल बा जे इतिहास में उहे मंदिर अकबर बाबर पर 
वीर रस के नाम प खाली लबराई बतियाये ला

फूहड़-फूहड़ जोक सुना के खुश बा हास्य कवि बाकिर
ए लोगन के सुन के श्रोता आंसू बहुत बहाये ला

प्रेम के शायर चांद सितार जुल्फ हुस्न के फेरा में 
अपने घरे मेहरारू से बड़का मार पिटाये ला

शहर में केहू पुछते नइखे तब्बो शायर अपना के 
मंच प चढ़ के जौन एलिया के मउसा बतलाये ला

राजीव कुमार

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Tuesday, November 12, 2024

कहीं खंजर कहीं पत्थर रहा है

ग़ज़ल 

कहीं खंजर कहीं पत्थर रहा है 
महब्बत का यही मंजर रहा है

जहां के कायदों से डर रहा है 
मेरे भीतर का शायर मर रहा है

 उसे दुनिया समझ आयेगी कैसे
जो बंदा सिर्फ अपने घर रहा है

 ज़मीं पर क़ैद हैं सारे परिंदे 
 वो जिनका घर कभी अम्बर रहा है

 उसी से हो गया है इश्क़ मुझको
मुकाबिल जो मेरे अक्सर रहा है

 नहीं पापा रहे पर है सकूं ये
मेरे सर पर भी इक छप्पर रहा है

 वही साधू है अब इस दौर में जो
पुराने दौर में अजगर रहा है

सितम दिल पर हमारे करने वालों 
ये फ्लावर भी कभी फायर रहा है

राजीव कुमार

नाकामियों का दौर बदलने का मज़ा देख

आज की ग़ज़ल 

नाकामियों का दौर बदलने का मज़ा देख 
आंखों में किसी ख्वाब के पलने का मज़ा देख

पैरों से लहू अपने निकलने का मज़ा देखा 
कांटों से भरी राह पे चलने का मज़ा देख

दुनिया तो गिराती है गिरा देगी मगर यार
तू गिर गया तो गिर के सम्भलने का मज़ा देख

ये दीन धरम जात अना चोंचले हैं सब
इन सब को किसी रोज कुचलने का मज़ा देख

किस किस को मिटायेगा भला किससे लड़ेगा
तू जंग नहीं जंग के टलने का मज़ा देख

परवाने का शम्मा की महब्बत में नहीं यार
तू खुद किसी के इश्क़ में जलने का मज़ा देख

सागर के किसी छोर पे सूरज को मेरी जान 
बाहों में मेरी बैठ के ढलने का मज़ा देख

राजीव कुमार

प्रेम में पर के ई बुझाइल बा

भोजपुरी ग़ज़ल 

प्रेम में पर के ई बुझाइल बा 
दिल प केतना वजन धराइल बा

कबले रोकी पहाड़ा दरिया के 
लोर रोकला से कब रोकाइल बा

नेह, वादा आ बेवफाई के
सबके नटई में दुख बन्हाइल बा

शेर बनेला नवका प्रेमी लोग
जे पुरनिया बा ऊ डेराइल बा

दिल के दुनिया अजोर जे कइलस
उहे दियवे त अब बुताइल बा

चांद का, चांदनी का, का सूरज
उनके चेहरा में सब समाइल बा

सपना आंखी में जिनके बा उनके
नींद अच्छा से कहिया आइल बा

जेकरे खातिर बहार नइखे ऊ
फूल पतझड़ में कब फुलाइल बा 

साथ छुटला प टूट जाला लोग
हर काहानी में ई लिखाइल बा

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...