Monday, October 16, 2023

बेच के दर्द कुछ कमाये ला लोग





भोजपुरी ग़ज़ल

बेच के दर्द कुछ कमाये ला 
लोग मजमा इहां लगाये ला 

दुख के मतलब ऊ जान पाये ला
जे करेजा प चोट खाये ला।

भूल कइनीं जे प्रेम में पड़नी।
सभे आखिर में ई बताये ला।

जान देहला से काम ना होई
बा बहुत लोग दिल लगाये ला

चांद मासूम ह ई मत बूझिह 
धूप से रौशनी चोराये ला

बाद पतझड़ के हर बगइचा में
फूल हर‌ रंग के फुलाये ला 

उहे जीते ला इश्क के बाजी 
चोट खा के जे मुस्कुरायेला 

राजीव कुमार

Saturday, September 9, 2023

दुनिया त मिल गइल बा मगर दर नाहीं मिलल

भोजपुरी ग़ज़ल 

दुनिया त मिल गइल बा मगर दर नाहीं मिलल
घर छोड़ला के बाद कबो घर नाही मिलल

एक दोसरा के चाह में जिनकी कटल मगर 
दिल के जमीं से प्रेम के अम्बर नाहीं मिलल

रास्ता में कींच पांक कांट सब मिलल मगर 
मंजिल हमन के आज ले मनगर नाहीं मिलल 

शोहरत के आसमान लेके का करल जा ई 
जिनगी में जब सकून के सागर नाहीं मिलल

दुनिया में ओके रुउवां कइसे जोह लेम जी 
जे आप के ही आप के भीतर नाहीं मिलल 

मुश्किल बा जीत हमरा के तब्बो लड़े के बा 
मन में त ई ना आई कि अवसर नाहीं मिलल 

ई का जुलम ना ह कि रउंवा हमरे सामने 
रो रो के ई कहेनीं कि दिलबर नाहीं मिलल 

ताकत के दम पs प्रेम मिटा दे बs जहां से 
लागत बा तोहके प्रेम के जांगर नाहीं मिलल

राजीव कुमार

Saturday, May 20, 2023

सियाह रात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

ताजा गज़ल

सियाह रात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी 
ग़म-ए-हयात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

जो दिल के दर्द लहू से ग़ज़ल में लिक्खे हैं
वो काग़ज़ात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

कभी उम्मीद कभी आरज़ू कभी चाहत 
अब इस बिसात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

ये ज़ख़्म ज़ख़्म नहीं हैं, जूनून है अपना 
इस एक बात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

सँवरना उनका और उस पर मचल के यूँ चलना
वो एहतियात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

सभी से इश्क़, सभी से वफ़ा, सभी  की  मदद
हम अपनी ज़ात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

किसी जहां में सुकूं हमको मिल नहीं सकता
सो क़ायनात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

हम ऐसे लोग जो आशिक़ हैं और शायर भी
वो इस जमात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

ख़िलाफ़ ज़ुल्म के हर बार जंग लिखने को 
कलम, दवात से निकलें तो ख़ुश रहें हम भी

राजीव कुमार

Tuesday, May 16, 2023

सौ दुखन के बस एगो दवाई रहे

भोजपुरी - हमार माई 

सौ दुखन के बस एगो दवाई रहे 
घर के घर जे बनवलस ऊ माई रहे

पिट्ठा रिकवच आ भौरी खटाई रहे
सतुआ गर्मी में खिचड़ी में लाई रहे

माई हमरे ला रहे मगर गांव में 
दादी मौसी बुआ और ताई रहे

हर बुराई के जंजाल के काटेला 
माई भीतर के हमरे भलाई रहे

प्रेम बाबू जी के लागे छड़ी नियर 
माई खिसीयाये तब्बो मलाई रहे

अपने लइकन के पालल पढ़ावल खुशी
माई खातिर बस इहे लड़ाई रहे

बाबू जी नाही रहलन ए दुनिया में जब
बाबू जी के जगहिया प माई रहे

माई रsहे त जिनगी के हर मोड़ प
हर मुसीबत के पर्वत भी राई रहे

आज माई गइल त इ मालुम परल 
हमरे जिनगी के उहे कमाई रहे

राजीव कुमार

Thursday, March 16, 2023

पहले पहल मुसीबत हमला‌ करती है

ग़ज़ल 

पहले पहल मुसीबत हमला‌ करती है 
फिर देखो ये हिम्मत क्या क्या करती है

अपनी मेहनत से जो राह बनाते हैं
उनके आगे किस्मत सजदा करती है

चोरी चुपके इश्क किया हमने फिर भी
बात हमारी सारी दुनिया करती है

बस ये सोच के मैंने उसको माफ किया 
नफरत सिर्फ अजीयत पैदा करती है

जंगल हो या सोने की लंका यारो
आग से हर इक शय जल जाया करती है

वनवासी जो राजा बनता है उसकी
दुनिया युगों युगों तक पूजा करती है

राजीव कुमार 🙏🏻❤️

बात बात पर मुझसे रूठा करती है

बात बात पर मुझसे रूठा करती है 
फिर भी हसते हसते झगड़ा करती है

कोलेज के केन्टीन में बैठ के घंटों तक
मेरी आंख में खुद को देखा करती है

मत पूछो वो कितनी पागल है लड़की
मेरी जान का मुझसे सौदा करती है

काल सहेली को दिन भर करती है पर 
मैसेज मुझको इक्का दुक्का करती है

खामोशियां जब भी घेरती हैं मुझको
जहन में तब वो आ के हल्ला करती है

लिपट के रोने लगती है वो ये कह के
मां मेरी शादी का चर्चा करती है

ग़ज़ल वो नेमत है जो दिल की बातों को
कहने में आसानी पैदा करती है

राजीव कुमार

Tuesday, February 7, 2023

गांव के खुश्बू भूल के गर्दा शहर के फांके आइल बा

भोजपुरी ग़ज़ल 

गांव के खुश्बू भूल के गर्दा शहर के फांके आइल बा 
असली दौलत छोड़ के नकली माल कमाये आइल बा

माई के हाथ के लिट्टी चोखा सत्तू ठेकुआ छोड़ के अब
केतना लोग शहर में छुछे रोटी खाये आइल बा

खेत बगईचा इनरा पोखर महुआ गूलर सरसों धान
जब्बो आंख मुदाइल आंख में सपना इहे आइल बा।

पहिला प्यार भइल जेकरा से अब्बो गांव में बीया ऊ
लोग दवाई छोड़ के शहर  दर्द बढ़ावे आइल बा

चांद सितारा जुगनू बारिस सगरो पिंक लिफाफा में 
रख के भेजs ले बीया बुचिया डाकीया लेके आइल बा

याद त होखबे कsरी तहके सावन के पहिला बरसात। 
माई कहे दे खs धरती पर बादर घुम्मे आइल बा

मंज़िल सामने बाटे तब्बो बइठ के सोचत बानी हम 
हमरे जइसे आखिर केतना लोग इहां ले आइल बा

गांव से शsहर जाये वाली ट्रेन प चढ़ते लागेला 
आत्मा पीछे छूट गइल बा देह अकेले आइल बा

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...