Friday, December 23, 2022

ज्ञान आपन बड़ावल भी हsटे बिहानदिल से नफरत मिटावल भी हsटे बिहान

ज्ञान आपन बड़ावल भी हsटे बिहान
दिल से नफरत मिटावल भी हsटे बिहान

फूल के मुस्कूरावल भी हsटे बिहान
रंग आपन देखावल भी हsटे बिहान 

सिर्फ सूरज के उगला से ना होला हो
एगो दियरी जरावल भी हsटे बिहान

गांव से दूर होखला प मालुम परल 
खेत में कुछ उगावल भी हsटे बिहान

 प्रेम जहवां बा उंहवा ए संसार में 
एक दुजे के पावल भी हsटे बिहान

झूठ के सगरो जंजाल के तूर के 
सच के चीरई उड़ावल भी हsटे बिहान

 खाली पुजला से नाहीं अनहरिया मिटी
लईकियन के पढ़ावाल भी हsटे बिहान

अन्धविश्वास जाति धरम के जहर 
सबके मन से मिटावल भी हsटे बिहान

एगो सूरज डूबा के उगावला खातिर 
छठ के दउरा उठावल भी हsटे बिहान

का महेन्दर मिसिर का भिखारी बबा 
गीत ए लो के गावल भी हsटे बिहान

राजीव कुमार

ज्ञान आपन बड़वला से होला बिहान

केहू पूछे‌ कि बिहान का होला त इ दे देब 😊

*बिहान*

ज्ञान आपन बड़वला से होला बिहान 
दिल से नफरत मिटवला से होला बिहान 

फूल के मुस्कूरवला से होला बिहान 
रंग आपन देखवला से होला बिहान 

खाली सूरज के उगला से ना होला हो
एगो दियरी जरवला से होला बिहान 

गांव से दूर होखला प मालुम परल 
खेत में कुछ उगवला से होला बिहान 

 प्रेम जहवां बा उंहवा ए संसार में 
एक दुजे के पवला से होला बिहान 

झूठ के सगरो जंजाल के तूर के 
सच के चीरई उड़़वला से होला बिहान 

 खाली पुजला से नाहीं अनहरिया मिटी
लईकियन के पढवाला से होला बिहान 

अन्धविश्वास जाति धरम के जहर 
सबके मन से मिटवला से होला बिहान 

एगो सूरज डूबा के उगावला खातिर 
छठ के दउरा उठवला से होला बिहान 

का महेन्दर मिसिर का भिखारी बबा 
गीत ए लो के गवला से होला बिहान 

राजीव कुमार

Friday, December 2, 2022

उन्निस के बात छोड़ के बाइस के ओर देख

भोजपुरी 

उन्निस के बात छोड़ के बाइस के ओर देख 
बाईस में आ के बोले लें चौबिस के ओर देख

उत्सव के साल हटे तू अमरित के बात कर  
रोटी के मोह छोड़ के किसमिस के ओर देख 

अन्याय जुल्म दर्द अउर मर चुकल समाज  
देखे के बा त शर्म से बिल्किस के ओर देख

कब्बो त अपने झूठ के चश्मा ऊतार के 
आंखी से अपने देश के मुफ्लिस के ओर देख

हमनी के हर सवाल प मी ल ता ई जवाब 
मालिक के बात छोड़ के वारिस के ओर देख 

सगरो अमीर लोग के बगली में डाल के 
क ह ता नौजवान से पूलिस के ओर देख

नफरत के आग कहियो जरा दी समूचा देश
भाई रे धर्म जात के माचिस के ओर देख

लागता देश फिल्म ह आ प्रेम चोपड़ा 
क ह तरें सूनील से नर्गिस के ओर देख

शायर R कुमार

Wednesday, November 30, 2022

भोजपुरी गीत बिहान

भोजपुरी गीत बिहान 

अपने ताकत के ना आजमावल गईल
हाथ से हाथ जे ना मिलावल गईल 
दिल में दियरी न जबले जरावल गईल
प्रेम के गीत मिल कि ना गावल गईल 
तबले सूरज से कहत रही आसमान 
कहिया होई बिहान 
कबले होई बिहान

खेत खलिहान में सब उजर जाई हो
सबके सपना भी आंखी में मर जाई हो 
घsर जर जाई बाचल रही बस महल 
ए मूसीबत के मीली ना कौनो बदल 
हथ मल के कही नौजवान आ किसान 
कहिया होई बिहान
कबले होई बिहान

मांग करब तू हक के त गाली मिली 
कब्बो गोली मीली कब्बो लाठी मिली 
अपने भय के मिटा  द जमाना मिली
ना त  ठेहा मिली ना ठिकाना मिली 
उठ के पुछे ला ना जे तू खोल ब जबान  
कहिया होई बिहान 
कबले होई बिहान

ए से पहिले अन्हरिया निगल जाये सब 
केहू पूछे की जीवन मिली हमके कब 
कबले घर होई कबले मिली नौकरी 
गांव में हमनी के कबले आई खुशी 
ना त जियते जी सब इंहवां होई जियान  
कहिया होई बिहान
कबले होई बिहान

राजीव कुमार

Tuesday, November 15, 2022

प्रभारी न्याय पंचायत कृषि

*प्रभारी न्याय पंचायत कृषि*

हर इक मुश्किल को‌ सहता है प्रभारी न्याय पंचायत
मगर हर काम करता‌ है‌ प्रभारी न्याय पंचायत

जहां तक जा नहीं सकती कोई गाड़ी सवारी भी।
वहां मौजूद रहता‌ है प्रभारी न्याय पंचायत

कभी साहब कभी जनता कभी नेताओं की खिच-खिच
सभी की बात सुनता है प्रभारी न्याय पंचायत

रसायन बीज यंत्रों और किसानों की जरूरत को।
हमेशा पूरा करता है प्रभारी न्याय पंचायत

ये सब स्टोर लेजर कैसबुक चालान और डीटू‌ 
इन्हीं में जीता मरता है प्रभारी न्याय पंचायत

जरूरत से जयादा बीज आवंटन अगर हो तो 
रीकवरी खुद से भरता है प्रभारी न्याय पंचायत

बिना एफटीए टैंकों चेक डामों के लिए हर दिन
पहाड़ों पर भटकता है प्रभारी न्याय पंचायत

इलेक्शन बीमा ट्रेनिंग आपदा शासन प्रशासन की
हर इक ड्यूटी में पिसता है प्रभारी न्याय पंचायत

कई पंचायतों के चार्ज हैं और एक स्कूटी।
बेचारा फिर भी चलता है प्रभारी न्याय पंचायत

न तो है सैलरी अच्छी ना ही है ओपीएस पेंशन।
अजी ऐसा ही होता है प्रभारी न्याय पंचायत।

राजीव कुमार
सहायक कृषि अधिकारी वर्ग 1
ओखलकाण्डा नैनीताल

Monday, September 5, 2022

खुश्बू का लुत्फ लीजीये मौसम के साथ साथ

खुश्बू का लुत्फ लीजीये मौसम के साथ साथ
गांधी को बात  कीजीये  गौतम के साथ साथ

अपने   हको   हकूक  को  पाना  है तो हूजूर 
आवाज  भी  उठाईये  परचम  के साथ साथ

सारे  गुलाम   बन  गये   इक्का  तो   देखना 
रोयेगा  बादशाह  भी  बेगम  के  साथ साथ

दिलवर की याद आये तो गजलो को गाईये 
जख्मों के नाम लीजीये मरहम के साथ साथ

अब तक की जिन्दगी का यही फलस्फा है के
लूडो का खेल खेलिये कैरम के साथ साथ

असलम के साथ दोस्ती राजीव की ए दोस्त
दिखती है जैसे रौशनी शबनम के साथ साथ

राजीव कुमार

Thursday, September 1, 2022

बाजी कहां बा अब इहां रानी के हाथ में

भोजपुरी ग़ज़ल 

      बाजी  कहां बा  अब इहां रानी के हाथ में
      अब खेल आ गइल बा अडानी के हाथ में

      जी जान से हर रोल निभवला के बाद भी 
      नाटक   के  जान  बाटे कहानी के हाथ में

      अंखिया के अन्जुरी में बचावल ना गईल त 
      हमनी के प्यास मर जा ई पानी के हाथ में

      जे तीर बन के उड़ रहल बा उनकरो उड़ान
      हर दम  गुलाम  रsही  कमानी  के  हाथ  में

      बदलाव तबले आ ई ना लोगन के सोच में 
      जबले  ना  देश  आई  जवानी  के हाथ में

      उनकर दिहल हर एक घाव अबले देह पर
      रखले  बानी  जतन से निशानी के हाथ में

      तोहके  अगर  उड़ाए के बा  प्रेम  के पतंग
      तs डोर  दिल  के दे दs रवानी के हाथ में

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...