Tuesday, December 31, 2019

जिसको जाना था जा चुका है अभी

ग़ज़ल

जिसको जाना था जा चुका है अभी
दर खुला किस लिये रखा है अभी

क्या हुआ ये भी सोचना है अभी
वो ही क्यु हमसे मुब्तिला है अभी

आग दिल मे लगा के अपने ही
दिल को जलता भी देखना है अभी

शह्र जाना है तो चले जाओ
पर वहां धुंध की हवा है अभी

कितने लोगों ने खुदकशी की है
और कितनों को ढूबना है अभी

किस तरह पैरहन से पहचानें 
मुल्क़ में कौन मर रहा है अभी

राजीव कुमार

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