ग़ज़ल
जिसको जाना था जा चुका है अभी
दर खुला किस लिये रखा है अभी
क्या हुआ ये भी सोचना है अभी
वो ही क्यु हमसे मुब्तिला है अभी
आग दिल मे लगा के अपने ही
दिल को जलता भी देखना है अभी
शह्र जाना है तो चले जाओ
पर वहां धुंध की हवा है अभी
कितने लोगों ने खुदकशी की है
और कितनों को ढूबना है अभी
किस तरह पैरहन से पहचानें
मुल्क़ में कौन मर रहा है अभी
राजीव कुमार
जिसको जाना था जा चुका है अभी
दर खुला किस लिये रखा है अभी
क्या हुआ ये भी सोचना है अभी
वो ही क्यु हमसे मुब्तिला है अभी
आग दिल मे लगा के अपने ही
दिल को जलता भी देखना है अभी
शह्र जाना है तो चले जाओ
पर वहां धुंध की हवा है अभी
कितने लोगों ने खुदकशी की है
और कितनों को ढूबना है अभी
किस तरह पैरहन से पहचानें
मुल्क़ में कौन मर रहा है अभी
राजीव कुमार
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