ग़ज़ल
वीरान दरख़्तों को यूं शाद करेंगे हम।
पिंजरे से परिन्दों को आज़ाद करेंगे हम।
इस तरह महब्बत अब हम भी निभायेंगे।
जब याद करोगी तुम तब याद करेंगे हम।
जब होगे नहीं तुम तो हर रोज ग़ज़ल लिख कर।
इस हिज्र के मौसम को आबाद करेंगे हम।
मरना तो ग़लत होगा इक शख़्स को खोने पर।
जीने का नया मक्सद ईज़ाद करेंगे हम।
हर रोज नया दुश्मन मुश्किल है बना पाना।
सो अपने लिए ख़ुद ही बेदाद करेंगे हम।
बेदाद - अत्याचार
ईमान वफ़ा चाहत दुनिया के सभी रिश्ते।
किस-किस को तेरी ख़ातिर बर्बाद करेंगे हम।
किरदार कहानी का कुछ ऐसे पलट देंगे।
ओहदे में परिंदे को सय्याद करेंगे हम।
हर फ़ैसला जालिम के हक़ मे ही अगर होगा।
फिर किसकी अदालत में फरियाद करेंगे हम।
कहते हैं सभी मुन्सिफ़ साहब की अदालत में।
जो आप कहोगे वो उस्ताद करेंगे हम।
राजीव कुमार
वीरान दरख़्तों को यूं शाद करेंगे हम।
पिंजरे से परिन्दों को आज़ाद करेंगे हम।
इस तरह महब्बत अब हम भी निभायेंगे।
जब याद करोगी तुम तब याद करेंगे हम।
जब होगे नहीं तुम तो हर रोज ग़ज़ल लिख कर।
इस हिज्र के मौसम को आबाद करेंगे हम।
मरना तो ग़लत होगा इक शख़्स को खोने पर।
जीने का नया मक्सद ईज़ाद करेंगे हम।
हर रोज नया दुश्मन मुश्किल है बना पाना।
सो अपने लिए ख़ुद ही बेदाद करेंगे हम।
बेदाद - अत्याचार
ईमान वफ़ा चाहत दुनिया के सभी रिश्ते।
किस-किस को तेरी ख़ातिर बर्बाद करेंगे हम।
किरदार कहानी का कुछ ऐसे पलट देंगे।
ओहदे में परिंदे को सय्याद करेंगे हम।
हर फ़ैसला जालिम के हक़ मे ही अगर होगा।
फिर किसकी अदालत में फरियाद करेंगे हम।
कहते हैं सभी मुन्सिफ़ साहब की अदालत में।
जो आप कहोगे वो उस्ताद करेंगे हम।
राजीव कुमार
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