ग़ज़ल
नयी रदीफ नये काफिये लिखे हमने
कि जब से आप की आमद हुई है बातों में
वो जिसके काम का कोई भी एतबार नहीं
उसी की ख़ूब ख़ुशामद हुई है बातो में
अदब ने रोक लिया इस लिये रुके वरना
हमारी आप की कब हद हुई है बातों में
बगैर उसके मुकम्मल कोई भी बात कहां
वो जब से साहिबे मसनद हुई है बातों में
तेरी खुशी से पता चल रहा है कि उससे
वो एक बात भी शायद हुई है बातों में
राजीव कुमार
जब उसकी बात भी बेहद हुई है बातों मेंग़ज़ल सी ख़ुश्बू बरामद हुई है बातों में
नयी रदीफ नये काफिये लिखे हमने
कि जब से आप की आमद हुई है बातों में
वो जिसके काम का कोई भी एतबार नहीं
उसी की ख़ूब ख़ुशामद हुई है बातो में
अदब ने रोक लिया इस लिये रुके वरना
हमारी आप की कब हद हुई है बातों में
बगैर उसके मुकम्मल कोई भी बात कहां
वो जब से साहिबे मसनद हुई है बातों में
तेरी खुशी से पता चल रहा है कि उससे
वो एक बात भी शायद हुई है बातों में
राजीव कुमार
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