Wednesday, March 11, 2020

जब उसकी बात भी बेहद हुई है बातों में

ग़ज़ल

जब उसकी बात भी बेहद हुई है बातों में 
ग़ज़ल सी ख़ुश्बू बरामद हुई है बातों में

नयी रदीफ नये काफिये लिखे हमने
कि जब से आप की आमद हुई है बातों में

वो जिसके काम का कोई भी एतबार नहीं
उसी की ख़ूब ख़ुशामद हुई है बातो में

अदब ने रोक लिया इस लिये रुके वरना
हमारी आप की कब हद हुई है बातों में

बगैर उसके मुकम्मल कोई भी बात कहां
वो जब से साहिबे मसनद हुई है बातों में

तेरी खुशी से पता चल रहा है कि उससे
वो एक बात भी शायद हुई है बातों में

राजीव कुमार

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