ग़ज़ल
वो अलग बात है हम सबकी हिफाज़त न करो
पर गुज़ारिश है कि हर बात पे धत-धत न करो
धर्म और ज़ात की बुनियाद पे निस्बत न करो
ऐसा करना है तो फिर हम पे हकूमत न करो
कुछ गलत है तो उठो और उठा लो परचम
बैठ कर मुल्क़ की हर रोज शिक़ायत न करो
जह्र नफ़रत का कहीं भर के मिटा दे न हमें
ऐसे कानून की अब कोई हिमायत न करो
मिल के लोगों से ज़रा बात करो परखो भी
देख के शक़्ल किसी से भी रिफाक़त न करो
ये सियासत है सियासत में सगा कोई नहीं
आप बे वजह किसी शाह की बैअत न करो
अपनी मिट्टी से ज़ुदा हो ही नहीं सकते हम
ऐसा करने की सुनो आप भी हिम्मत न करो
राजीव कुमार
रिफाक़त- दोस्ती
बैअत - स्वामिभक्ति
वो अलग बात है हम सबकी हिफाज़त न करो
पर गुज़ारिश है कि हर बात पे धत-धत न करो
धर्म और ज़ात की बुनियाद पे निस्बत न करो
ऐसा करना है तो फिर हम पे हकूमत न करो
कुछ गलत है तो उठो और उठा लो परचम
बैठ कर मुल्क़ की हर रोज शिक़ायत न करो
जह्र नफ़रत का कहीं भर के मिटा दे न हमें
ऐसे कानून की अब कोई हिमायत न करो
मिल के लोगों से ज़रा बात करो परखो भी
देख के शक़्ल किसी से भी रिफाक़त न करो
ये सियासत है सियासत में सगा कोई नहीं
आप बे वजह किसी शाह की बैअत न करो
अपनी मिट्टी से ज़ुदा हो ही नहीं सकते हम
ऐसा करने की सुनो आप भी हिम्मत न करो
राजीव कुमार
रिफाक़त- दोस्ती
बैअत - स्वामिभक्ति
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