ग़ज़ल
हर एक सांस में मौक़ा दिया हंसो-खेलो।
ख़ुदा ने सबको ये तोहफा दिया हंसो-खेलो।
मैं बात कर ही रहा था कि यक-ब-यक माँ ने।
पकड़ के हाथ भरोसा दिया हंसो-खेलो।
गिला किसी से नहीं सबसे प्यार करना तुम।
हम ही ने सबको ये नुस्ख़ा दिया हंसो-खेलो।
किसी की डोली के उठते ही लब से आई सदा।
हर एक बात को दफ़्ना दिया हंसो-खेलो।
हमेशा जिसने सताया दग़ा किया हमसे।
उसी ने ये भी दिलासा दिया हंसो-खेलो।
वफ़ा, सुलूक, हया, इश्क़, शर्म ने अब तक।
किसे बतायें हमें क्या दिया हंसो-खेलो।
मुझे उम्मीद थी बांटेगा ग़म मिरे लेकिन।
ये कह के उसने भी धोखा दिया हंसो-खेलो।
वो मेरी लाश पे रोया लिपट के और बोला।
लो प्यार आपको अपना दिया हंसो-खेलो।
राजीव कुमार
हर एक सांस में मौक़ा दिया हंसो-खेलो।
ख़ुदा ने सबको ये तोहफा दिया हंसो-खेलो।
मैं बात कर ही रहा था कि यक-ब-यक माँ ने।
पकड़ के हाथ भरोसा दिया हंसो-खेलो।
गिला किसी से नहीं सबसे प्यार करना तुम।
हम ही ने सबको ये नुस्ख़ा दिया हंसो-खेलो।
किसी की डोली के उठते ही लब से आई सदा।
हर एक बात को दफ़्ना दिया हंसो-खेलो।
हमेशा जिसने सताया दग़ा किया हमसे।
उसी ने ये भी दिलासा दिया हंसो-खेलो।
वफ़ा, सुलूक, हया, इश्क़, शर्म ने अब तक।
किसे बतायें हमें क्या दिया हंसो-खेलो।
मुझे उम्मीद थी बांटेगा ग़म मिरे लेकिन।
ये कह के उसने भी धोखा दिया हंसो-खेलो।
वो मेरी लाश पे रोया लिपट के और बोला।
लो प्यार आपको अपना दिया हंसो-खेलो।
राजीव कुमार

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