Friday, March 20, 2020

हर एक सांस में मौक़ा दिया हंसो-खेलो।

ग़ज़ल
हर  एक  सांस  में  मौक़ा  दिया  हंसो-खेलो।
ख़ुदा ने सबको ये  तोहफा दिया हंसो-खेलो।

मैं बात कर ही रहा था कि यक-ब-यक माँ ने।
पकड़  के   हाथ  भरोसा  दिया  हंसो-खेलो।

गिला किसी  से नहीं सबसे प्यार करना तुम।
हम ही ने सबको ये नुस्ख़ा दिया हंसो-खेलो।

किसी की डोली के उठते ही लब से आई सदा।
हर  एक  बात  को  दफ़्ना  दिया हंसो-खेलो।

हमेशा  जिसने   सताया  दग़ा   किया  हमसे।
उसी  ने   ये  भी  दिलासा  दिया  हंसो-खेलो।

वफ़ा, सुलूक,  हया,  इश्क़,  शर्म  ने अब तक।
किसे  बतायें   हमें   क्या   दिया   हंसो-खेलो।

मुझे   उम्मीद   थी  बांटेगा   ग़म  मिरे  लेकिन।
ये  कह  के  उसने भी धोखा दिया हंसो-खेलो।

वो  मेरी  लाश  पे  रोया  लिपट  के और बोला।
लो  प्यार  आपको  अपना  दिया  हंसो-खेलो।

राजीव कुमार



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