Sunday, July 2, 2017

आईने के लिये इक आईना जरूरी है

आईने के लिये इक आईना जरूरी है
यार ऐसा है जहां में खुदा जरूरी है

आसमां सर पे उठाने से कुछ नहीं होगा।
बात करने के लिये कायदा जरूरी है

सारे अरमान सभी ख़वाब लग गये बोलो
घर बनाने के लिये और क्या जरूरी है

उम्र भर गम है उठाना इसी लिये शायद
गम भुलाने के लिये मयकदा जरूरी है

दर्द के बाद सफर का मजा भी आयेगा
चलते कदमों के लिये आबला जरूरी है

अबके बारिस में ये महसूस हो रहा है के।
सर्द मौसम में कोई हमनवा जरूरी है

राजीव कुमार

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