फूल के ही साथ देखो खार है
गर समझिये तो यही संसार है
गर यही दौरे तरक्की है तो क्युं
हर किसी के हाथ में तलवार है
जिन्दगी भर क्या कमाया सोचिये
मौत के आगे तो सब बेकार है
नेक नीयत आदमीयत छोड़ कर
जहनियत से आदमी बीमार है
खुदकुशी का रोक दे जो सिलसिला
हां किसानो की वही सरकार है।
राजीव कुमार
गर समझिये तो यही संसार है
गर यही दौरे तरक्की है तो क्युं
हर किसी के हाथ में तलवार है
जिन्दगी भर क्या कमाया सोचिये
मौत के आगे तो सब बेकार है
नेक नीयत आदमीयत छोड़ कर
जहनियत से आदमी बीमार है
खुदकुशी का रोक दे जो सिलसिला
हां किसानो की वही सरकार है।
राजीव कुमार
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