जब कभी आईने से कुर्बत की
रोये हालत पे अपने सूरत की
आज तालीम मुल्क की जैसे
पक्की बुनियाद है इमारत की
झूठ हर बार जीत जाता है
सच बताउं मैं क्या अदालत की
और भी लोग हैं बुरे फिर भी
आपने मुझसे क्युं बगावत की
मुश्किलातों ने उम्र भर हमसे
क्या कहूं कैसी कैसी हरकत की
वक्ते रुक्सत मुझे लगा मुझ पर
जिन्दगी ने बहुत अजीयत की
राजीव कुमार
शुभ रात्री
रोये हालत पे अपने सूरत की
आज तालीम मुल्क की जैसे
पक्की बुनियाद है इमारत की
झूठ हर बार जीत जाता है
सच बताउं मैं क्या अदालत की
और भी लोग हैं बुरे फिर भी
आपने मुझसे क्युं बगावत की
मुश्किलातों ने उम्र भर हमसे
क्या कहूं कैसी कैसी हरकत की
वक्ते रुक्सत मुझे लगा मुझ पर
जिन्दगी ने बहुत अजीयत की
राजीव कुमार
शुभ रात्री
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