ग़ज़ल
आप से मेरी दोस्ती होती
दुश्मनी मुंह छुपा रही होती
कुछ दुआओ में भी असर होता
इक दफा आपने तो दी होती
आईना घूरता नहीं यूं ही।
आप में गर नहीं कमी होती
आग पानी हवा जमीं अम्बर
कुल मिला कर है जिन्दगी होती
अब न गांधी रहे न ही गौतम
काश फिर वैसी सादगी होती
हमसे सुनते सूनाते कुछ अपनी
तो ग़ज़ल भी गजल हुई होती
राजीव कुमार
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
आप से मेरी दोस्ती होती
दुश्मनी मुंह छुपा रही होती
कुछ दुआओ में भी असर होता
इक दफा आपने तो दी होती
आईना घूरता नहीं यूं ही।
आप में गर नहीं कमी होती
आग पानी हवा जमीं अम्बर
कुल मिला कर है जिन्दगी होती
अब न गांधी रहे न ही गौतम
काश फिर वैसी सादगी होती
हमसे सुनते सूनाते कुछ अपनी
तो ग़ज़ल भी गजल हुई होती
राजीव कुमार
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