Sunday, June 25, 2017

आप से मेरी दोस्ती होती

ग़ज़ल

आप से मेरी दोस्ती होती
दुश्मनी मुंह छुपा रही होती

कुछ दुआओ में भी असर होता
इक दफा आपने तो दी होती

आईना घूरता नहीं यूं ही।
आप में गर नहीं कमी होती

आग पानी हवा जमीं अम्बर
कुल मिला कर है जिन्दगी होती

अब न गांधी रहे न ही गौतम
काश फिर वैसी सादगी होती

हमसे सुनते सूनाते कुछ अपनी
तो ग़ज़ल भी गजल हुई होती

राजीव कुमार
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

No comments:

Post a Comment

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...