जात मजहब की खातिर न तूफान कर।
खुद भी इन्सान बन मुझको इन्सान कर।
जिस जमीं पर बसा है ये सारा जहां।
उसकी मिट्टी का थोड़ा तो सम्मान कर।
मयकदे में अगर तुझको आना है तो
दफ्न मिट्टी में तू दीन ओ ईमान कर
गर मेरी बेखुदी से सिकायत है तो।
मुझको काफिर बता मुझ पे अहसान कर।
उम्र भर बैठ कर तन्हा रोयेगा तू।
दिल की दुनिया को ऐसे न वीरान कर।
बेदिली बुजदिली बेहयाई जफा।
अपने भीतर से बाहर ये सामान कर।
कौन दिल से जुड़ा कौन मतलब से है।
दोस्त बनने से पहले ये पहचान कर।
आज बाजार में दिल लिये हूं खड़ा।
यार बोली लगा मत परेशान कर।
इश्क और जंग मे सब है जायज यहां।
दिल के मैदान पर कुछ तो ऐलान कर।
बंदगी शायरी आशिकी क्या करूं।
ए खुदा जिस्त थोड़ी तो आसान कर।
राजीव कुमार
खुद भी इन्सान बन मुझको इन्सान कर।
जिस जमीं पर बसा है ये सारा जहां।
उसकी मिट्टी का थोड़ा तो सम्मान कर।
मयकदे में अगर तुझको आना है तो
दफ्न मिट्टी में तू दीन ओ ईमान कर
गर मेरी बेखुदी से सिकायत है तो।
मुझको काफिर बता मुझ पे अहसान कर।
उम्र भर बैठ कर तन्हा रोयेगा तू।
दिल की दुनिया को ऐसे न वीरान कर।
बेदिली बुजदिली बेहयाई जफा।
अपने भीतर से बाहर ये सामान कर।
कौन दिल से जुड़ा कौन मतलब से है।
दोस्त बनने से पहले ये पहचान कर।
आज बाजार में दिल लिये हूं खड़ा।
यार बोली लगा मत परेशान कर।
इश्क और जंग मे सब है जायज यहां।
दिल के मैदान पर कुछ तो ऐलान कर।
बंदगी शायरी आशिकी क्या करूं।
ए खुदा जिस्त थोड़ी तो आसान कर।
राजीव कुमार
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