ग़ज़ल
हर इक को इस जहां में महब्बत नहीं मिलती।
खैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती।
अपने लिये हर शख़्स परेशान है मगर।
औरों से कभी इसकी तबीयत नहीं मिलती।
तस्वीरे मुल्क तुम जो अभी देख रहे हो
अच्छे दिनों से इसकी भी सूरत नहीं मिलती
मेरे अजीज दोस्त मिरे हाल पर न जा।
गुर्बत में किसी शख़्स से किस्मत नहीं मिलती
अच्छा हूं बुरा हूं ये मेरी जाती बात है।
रहने दे तुझसे मेरी तबीयत नहीं मिलती
यूं तो जनाब आप की भी उम्र हो गयी ।
इस उम्र में अब हुस्न की दौलत नहीं मिलती
कितना अजीब शह्र है कि दिन में भी यहां।
हमको शरीफ शख़्स की रगबत नहीं मिलती।
राजीव कुमार
हर इक को इस जहां में महब्बत नहीं मिलती।
खैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती।
अपने लिये हर शख़्स परेशान है मगर।
औरों से कभी इसकी तबीयत नहीं मिलती।
तस्वीरे मुल्क तुम जो अभी देख रहे हो
अच्छे दिनों से इसकी भी सूरत नहीं मिलती
मेरे अजीज दोस्त मिरे हाल पर न जा।
गुर्बत में किसी शख़्स से किस्मत नहीं मिलती
अच्छा हूं बुरा हूं ये मेरी जाती बात है।
रहने दे तुझसे मेरी तबीयत नहीं मिलती
यूं तो जनाब आप की भी उम्र हो गयी ।
इस उम्र में अब हुस्न की दौलत नहीं मिलती
कितना अजीब शह्र है कि दिन में भी यहां।
हमको शरीफ शख़्स की रगबत नहीं मिलती।
राजीव कुमार
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