Thursday, July 13, 2017

आओ चल कर देखें हम भी शहरों में

आओ चल कर देखें हम भी शहरों में
क्या रौनक है चलती फिरती लाशों में

कहने को तो बारिस की कुछ बूंदें थी।
लेकिन सब कुछ डूब गया है गावों में

देखा लोगों को आते आरी ले कर
मातम पसरा है तब से इन चिड़ीयों में

सच्चे लोगों में कड़वाहट मिलती है
मीठापन मिलता है अक्सर झूठों में ।

तेरी सूरत, वो लम्हे और कुछ यादें
बाक़ी है अब भी इस दिल के टुकड़ों में

राजीव कुमार

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