उम्र भर कौन किसका रहबर है
हर कोई अपने गम के भीतर है
जिन्दगी मौत की लड़ाई में ।
जीत बस एक को मयस्सर है
रोज अखबार पढ़ के ये पाया
झूठ ही अब तो सच के उपर है
दर्दे दिल दर्दे सर न हो जाये।
आशिकी चीज भी तो दूभर है
राजीव कुमार
हर कोई अपने गम के भीतर है
जिन्दगी मौत की लड़ाई में ।
जीत बस एक को मयस्सर है
रोज अखबार पढ़ के ये पाया
झूठ ही अब तो सच के उपर है
दर्दे दिल दर्दे सर न हो जाये।
आशिकी चीज भी तो दूभर है
राजीव कुमार
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