हम अपनी गजल गर सुनाने लगेंगे
तुम्हें हम भी पागल दिवाने लगेंगे
मुहब्बत के किस्से जवानी की बातें
समझने में तुमको जमाने लगेंगे
अगर कब्र से लौट कर आ गया तो
ये सब फिर से आंसू बहाने लगेंगे
जो ईमान अपना संम्भाले हुए है
तुम्हें उनके कपड़े पुराने लगेंगे
चलो मयकदे में वहीं बात होगी
यहां आप हम पर चिल्लाने लगेंगे
राजीव कुमार
तुम्हें हम भी पागल दिवाने लगेंगे
मुहब्बत के किस्से जवानी की बातें
समझने में तुमको जमाने लगेंगे
अगर कब्र से लौट कर आ गया तो
ये सब फिर से आंसू बहाने लगेंगे
जो ईमान अपना संम्भाले हुए है
तुम्हें उनके कपड़े पुराने लगेंगे
चलो मयकदे में वहीं बात होगी
यहां आप हम पर चिल्लाने लगेंगे
राजीव कुमार
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