भूखों का भगवान नहीं था।
पर कोई बेजान नहीं था।
जितना आसां है अब मरना
तब उतना आसान नहीं था
बात ये तब की है यारों जब
जीने का सामान नहीं था
हिन्दू मुस्लिम सब तो थे पर।
कोई भी शैतान नहीं था ।
मुल्क गरीबी में था जब तक
कोई तुर्रम खान नहीं था।
राजीव कुमार
पर कोई बेजान नहीं था।
जितना आसां है अब मरना
तब उतना आसान नहीं था
बात ये तब की है यारों जब
जीने का सामान नहीं था
हिन्दू मुस्लिम सब तो थे पर।
कोई भी शैतान नहीं था ।
मुल्क गरीबी में था जब तक
कोई तुर्रम खान नहीं था।
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment