Monday, September 5, 2022

खुश्बू का लुत्फ लीजीये मौसम के साथ साथ

खुश्बू का लुत्फ लीजीये मौसम के साथ साथ
गांधी को बात  कीजीये  गौतम के साथ साथ

अपने   हको   हकूक  को  पाना  है तो हूजूर 
आवाज  भी  उठाईये  परचम  के साथ साथ

सारे  गुलाम   बन  गये   इक्का  तो   देखना 
रोयेगा  बादशाह  भी  बेगम  के  साथ साथ

दिलवर की याद आये तो गजलो को गाईये 
जख्मों के नाम लीजीये मरहम के साथ साथ

अब तक की जिन्दगी का यही फलस्फा है के
लूडो का खेल खेलिये कैरम के साथ साथ

असलम के साथ दोस्ती राजीव की ए दोस्त
दिखती है जैसे रौशनी शबनम के साथ साथ

राजीव कुमार

Thursday, September 1, 2022

बाजी कहां बा अब इहां रानी के हाथ में

भोजपुरी ग़ज़ल 

      बाजी  कहां बा  अब इहां रानी के हाथ में
      अब खेल आ गइल बा अडानी के हाथ में

      जी जान से हर रोल निभवला के बाद भी 
      नाटक   के  जान  बाटे कहानी के हाथ में

      अंखिया के अन्जुरी में बचावल ना गईल त 
      हमनी के प्यास मर जा ई पानी के हाथ में

      जे तीर बन के उड़ रहल बा उनकरो उड़ान
      हर दम  गुलाम  रsही  कमानी  के  हाथ  में

      बदलाव तबले आ ई ना लोगन के सोच में 
      जबले  ना  देश  आई  जवानी  के हाथ में

      उनकर दिहल हर एक घाव अबले देह पर
      रखले  बानी  जतन से निशानी के हाथ में

      तोहके  अगर  उड़ाए के बा  प्रेम  के पतंग
      तs डोर  दिल  के दे दs रवानी के हाथ में

राजीव कुमार

Sunday, August 28, 2022

जिन जिन को लग रहा था कि शेरों की मौज है

जिन जिन को लग रहा था कि शेरों की मौज है
अब वो ही कह रहे हैं कि गदहों की मौज है 

इस दौर के निजाम में भक्तों की मौज है 
यानी की अब समाज में कव्वों  की मौज है

चैनल जला रहे हैं अलख राष्ट्रवाद के 
यानी कि राष्ट्रवाद से गिद्धों की मौज है

जिन से कभी मरा नही चूहा वो कोकरोच। 
हमको बता रहे हैं कि चीतों की मौज है 

हिन्दू तङप के मर गये कोविड में और ये 
भाषण में बोलते हैं कि लोगों की मौज है

आम आदमी की नौकरी खतरे में है मगर
चंदे के लूट पाट में नल्लों की मौज है

बनते हैं सारे धर्म के रक्षक बङे-बड़े 
इनके ही राज पाट में गुण्डो की मौज है

लब्बो लूबाब ये है कि इस देश में अभी। 
शेरों की बात छोङिये कुत्तों  की मौज है

शायर Rajeev कुमार क्रोधित 😡

#desh_drohi_kalicharan

तख्ती लेकर घर से निकलो जोर से बोलो डूब मरो

तख्ती   लेकर  घर  से निकलो जोर से बोलो डूब मरो 
सरकारों   में    बैठने   वालों    कुर्सी  छोङो  डूब मरो

बस्ती-बस्ती  मातम   है    और    शह्रों-शह्रों   वीरानी।
देखो  आंखे  खोल  के  देखो देख  लिया तो डूब मरो

रहबर  से   उम्मीद   लगा के  क्यु  बैठे हो उठ जाओ 
वर्ना  अगली  नस्ल   कहेगी  हमको  जाओ  डूब मरो

गुलशन को  शमशान  बनाने  वालों ये भी रखना याद
जलती लाशे ख्वाब में हर शब कहेंगी तुमको डूब मरो

इस वहशत के मंजर से अंजान भी हो और खुश भी हो
ऐसे   झूठे   लोगों   को  अब  मुह पर कह दो डूब मरो

फस्ले  गुल   का   वादा था  पर  ले  आये  सहराओं में
अच्छा जब  आ  पहुंचे  हो  तो कुछ मत पूछो डूब मरो

कोई  मसीहा  कोई  मुसाहिब   कोई  सहाफी  आयेगा
आप  अभी  तक इन  सपनों में डूबे  हो  तो  डूब  मरो

अब तो घर से बाहर आ  कर  बोलना  होगा हाकिम से
साहब  हमको  मार दो या  फिर  ऐसा कर लो डूब मरो

अपनी   किस्मत   अपने  हाथों   लिखने   वाले जीतेगे
बहलावों   में   रहने    वालों    मेरी   मानो   डूब   मरो

राजीव कुमार

व्यवस्था ए समाज के खराब हो गइल बा अब

भोजपुरी 

व्यवस्था ए समाज के खराब हो गइल बा अब 

बेकार लोक तंत्र के किताब हो गइल बा अब


आवाज के उठाई जब डेरा रहल बा सब केहू

इ हाल नौजवान के जनाब हो गइल बा अब


जहाँ पे रोजी रोटी शिक्षा प्रेम के सवाल बा 

उंहा पुलिस के लाठीये जवाब हो गइल बा अब


लङाई जात धर्म के पहुच गइल गली-गली 

विकास ए नजर से  बे हिसाब हो गइल बा अब


जे साधू संत बा ऊहो ई देख के हरान बा 

फकीर राज-नीत में नवाब हो गइल बा अब 


भुजा रहल बा भुखमरी के आग के अलाव पर

गरीब आदमी इहां कबाब हो गइल बा अब


जे सांच बात बोले ऊ त कांट के समान बा।

जे सिर्फ झूठ बोले ऊ गुलाब हो गइल बा अब  


हर एक जुल्म ज्यादती के राज के छुपावे के

ई राम जी के नाम भी नकाब हो गइल बा अब


राजीव कुमार

सभनी के उड़ता तीर बना के रखे के बा

भोजपुरी 

सभनी के उड़ता तीर बना के रखे के बा 
लईकन के अग्निवीर बना के रखे के बा 

काहे ला बा हरान ई सब  नौजवान  लोग
हर एक के फकीर बना के रखे के बा

पेट्रोल नून तेल किरासन के भाव के।
असमान ले लकीर बना के रखे के बा

दंगा फसाद खून खराबा आ रेप पर 
बोले बिना जमीर बना के रखे के बा

हो भुखमरी के बात या हो मीडिया के हाल
भारत के अब नजीर बना के रखे के बा

खाये के मिले ना मिले पर खा तनी कसम
ओकरे के ही वजीर बना के रखे के बा

शिक्षा विकास रोजगार के अलाव पर 
जाति धरम के खीर बना के रखे के बा

अमृत के ई ऊ काल है जे में रवीश जी 
पानी से अब पनीर बना के रखे के बा

शायर राजीव कुमार

जइसन ए देश में अब महगाई हो रहल बा।

 भोजपुरी ग़ज़ल 

जइसन ए देश में अब महगाई हो रहल बा।
वइसे  कमाई  सबके  चौथाई हो  रहल बा।

बरियार के  त इहवा हर खून मा फ बा पर।
कमजोर  आदमी  से  बरियाई हो रहल बा।

जिनका के न्याय चाहीं उनके पे जुल्म होता।
अइसे त  पीड़िता  के  सुनवाई  हो रहल बा।

लाठी  के दम पे  शासन  परचार में तरक्की।
सेवा  करे  के  बा  पर  ढीठाई  हो  रहल बा।

हालत पढ़े लिखे  के  अइसन बा देश में की।
लइका  पढाई  पढ़  के  दंगाई  हो  रहल बा।

देखे  गरीब   बस्ती  केहू  न  ए  ला  ओकरे।
आगे   दिवार  चुन  के  रंगाई  हो  रहल  बा।

खेती   कमाई   धंधा   मेहरारू   के   सुरक्षा।
हर  काम  में इहां  पर  ढीलाई  हो  रहल बा।

मुस्लिम से आज हिन्दू अइसे कटल कि जइसे।
भाई  के  जानी दुश्मन अब भाई हो रहल बा।

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...