फिलबदीह ग़ज़ल
खुदा जानता है मैं क्या चाहता हूं
सभी के लिये मैं शिफा चाहता हूं
हर इक शक्स बीमार है इस जहां में
हर इक दर्द की अब दवा चाहता हूं
न हीरे न मोती न सोने न चांदी
मै बस आप सबकी दुआ चाहता हूं
तुम्हारे लिये ही कमाई है दौलत
मै कब यार अपना भला चाहता हू
अरे वो कहां है जो सच बोलता था
उसे आज फिर देखना चाहता हूं
गुलों की हिफाजत तो कांटें करेंगे
फजाओं में ठंडी हवा चाहता हूं
ये दैरो-हरम आप ही के लिये हैं
मै खुद के लिये मयकदा चाहता हूं
मुझे मंजिलों की जरूरत नहीं है
मै हमराह बस आप सा चाहता हूं
राजीव कुमार
Rajeev Kumar
खुदा जानता है मैं क्या चाहता हूं
सभी के लिये मैं शिफा चाहता हूं
हर इक शक्स बीमार है इस जहां में
हर इक दर्द की अब दवा चाहता हूं
न हीरे न मोती न सोने न चांदी
मै बस आप सबकी दुआ चाहता हूं
तुम्हारे लिये ही कमाई है दौलत
मै कब यार अपना भला चाहता हू
अरे वो कहां है जो सच बोलता था
उसे आज फिर देखना चाहता हूं
गुलों की हिफाजत तो कांटें करेंगे
फजाओं में ठंडी हवा चाहता हूं
ये दैरो-हरम आप ही के लिये हैं
मै खुद के लिये मयकदा चाहता हूं
मुझे मंजिलों की जरूरत नहीं है
मै हमराह बस आप सा चाहता हूं
राजीव कुमार
Rajeev Kumar