Sunday, June 25, 2017

फिलबदीह ग़ज़ल मुहब्बत के नाम
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गम न होता न ही खुशी होती
तू न मुझसे अगर मिली होती

तेरी यादों से शायरी होती
तू जो होती गजल हुई होती

हाय कितना हसीन मौसम है
जानेमन तू भी आ गयी होती

ये खिज़ा भी बहार हो जाती
तेरी खुश्बू अगर उड़ी होती

महजबीनो से दूर रहता तो
दिल की दुनियां नहीं बसी होती

मयकदा गम मिटा नहीं पाता
गर तू साकी नहीं बनी होती

मेरे दिलवर मिरे ख्यालों में
तू न होता तो तीरगी होती

मर गया या के मरने वाला हूं
ये खबर उनको हो गयी होती

राजीव कुमार


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