Friday, June 9, 2017

कभी मुझसे मेरी बन कर मिलोगी

कभी मुझसे मेरी बन कर मिलोगी
मेरी जां खुद ब खुद सब कुछ कहोगी

बहुत कुछ कहना सुनना चाहता था
मगर डरता था क्या तुम सुन सकोगी

न रोको खुद को आने से वगरना
मुझे ख्वाबो में तुम ही तुम दिखोगी

अधूरी तुम अधूरा मैं हूं लेकिन ।
जियुंगा जब तलक तुम भी जियोगी ।

मेरी दीवानगी को याद रखना ।
मेरे जैसी ही इक दिन तुम बनोगी।

राजीव कुमार

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