मतला
आशिकी का खुमार निकलेगा
आज दिल का गुबार निकलेगा
सामने आज वो भी बैठी है
शेर से आबशार निकलेगा
गौर से देखिये जमाने को
हर कोई दागदार निकलेगा
दर्द महसूस होगा दिल से जब
ये गमे नागवार निकलेगा
मेरी आंखों से आप का चेहरा
करके अब बेकरार निकलेगा
झूठ को सच बताने वाला अब
देखना पत्रकार निकलेगा
इश्क तेरा भी इक जनाजे सा
एक दिन शानदार निकलेगा
राजीव कुमार
आशिकी का खुमार निकलेगा
आज दिल का गुबार निकलेगा
सामने आज वो भी बैठी है
शेर से आबशार निकलेगा
गौर से देखिये जमाने को
हर कोई दागदार निकलेगा
दर्द महसूस होगा दिल से जब
ये गमे नागवार निकलेगा
मेरी आंखों से आप का चेहरा
करके अब बेकरार निकलेगा
झूठ को सच बताने वाला अब
देखना पत्रकार निकलेगा
इश्क तेरा भी इक जनाजे सा
एक दिन शानदार निकलेगा
राजीव कुमार
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