भोजपूरी ग़ज़ल
जेकरा भीतर डर बइठल बा
नेवा के ऊहे सर बइठल बा
ए धरती के ऊपर कब से
दे खअ ना अम्बर बइठल बा
के का करी देश के खातिर
सब केहू जब घर बइठल बा
हमरे भीतर के ऊ लईका
आजो ले ममहर बइठलबा
ए बाबू हम्मन के किस्मत
जाने कौन शहर बइठल बा
महल में तू त बा ड़ लेकिन
लोग इहां बेघर बइठल बा
दू कौङी के जान के खातिर
खोल के ऊ दफ्तर बइठल बा
जनता से ज्यादा इहवा के
अतना ताकतवर बइठल बा?
राजीव कुमार
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