Friday, June 23, 2017

जेकरा भीतर डर बइठल बा

भोजपूरी ग़ज़ल

जेकरा भीतर डर  बइठल बा
नेवा के ऊहे सर  बइठल बा 

ए धरती के ऊपर कब से
दे खअ ना अम्बर बइठल बा

के का करी देश के खातिर
सब केहू जब घर बइठल बा

हमरे भीतर  के ऊ लईका
आजो ले ममहर बइठलबा

ए बाबू हम्मन के किस्मत
जाने कौन शहर बइठल बा

महल में तू त बा ड़ लेकिन 
लोग इहां बेघर बइठल बा 

दू कौङी के जान के खातिर
खोल के ऊ दफ्तर बइठल बा 

जनता से ज्यादा इहवा के 
अतना ताकतवर बइठल बा?

राजीव कुमार

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