Monday, June 12, 2017

इश्क जैसा बुखार पहली बार।

फिलबदीह ग़ज़ल DrMustfa Mahir  साहब के दिये मिसरे पर

इश्क जैसा बुखार पहली बार।
सर पे अब है सवार पहली बार।

ऐसा लगता है अब मिरे दिल पर।
चड़ गया है खुमार पहली बार।

देख कर तुझको खो रहा हूं मैं।
खुद पे अब इख्तेयार पहली बार।

दिल की दुनिंया में हो गयी हलचल।
जब हुआ बेकरार पहली बार ।

आप आये थे जब हमारे घर।
आयी थी तब बहार पहली बार।

जिन्दगी थी मिली फजांओं को ।
आप के दम से यार पहली बार ।

याद आयी तेरी तो आखो से।
बह गयी मय की धार पहली बार।

जिन्दगी भर नही चुका पाया ।
जो बना कर्जदार पहली बार।

नाम राजीव है मिरा लेकिन ।
उसने बोला कुमार पहली बार।


  • राजीव कुमार

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