ग़ज़ल कुछ नये अन्दाज में
दिल की दीवारों के पत्थर तुड़वा दो।
या इन दीवारों में हमको चुनवा दो।
अब तक तो आसान हमारा जीना था।
अच्छा है अब थोड़ी मुश्किल करवा दो।
अपने हाथो खुद को मार नहीं सकते ।
ऐसा कर लो तुम ही हमको मरवा दो।
कितना ऊपर उड़ सकता हूं देखोगे।
लेकिन पहले पर तो मेरे कटवा दो ।
भीतर का क़िरदार तुम्हारा मालुम है।
ये दीनो ईमान के पर्दे हटवा दो ।
दिल की बस्ती दिल दुनिया इश्क मेरा।
ये लो ले जाओ इन सब को जलवा दो ।
राजीव कुमार
दिल की दीवारों के पत्थर तुड़वा दो।
या इन दीवारों में हमको चुनवा दो।
अब तक तो आसान हमारा जीना था।
अच्छा है अब थोड़ी मुश्किल करवा दो।
अपने हाथो खुद को मार नहीं सकते ।
ऐसा कर लो तुम ही हमको मरवा दो।
कितना ऊपर उड़ सकता हूं देखोगे।
लेकिन पहले पर तो मेरे कटवा दो ।
भीतर का क़िरदार तुम्हारा मालुम है।
ये दीनो ईमान के पर्दे हटवा दो ।
दिल की बस्ती दिल दुनिया इश्क मेरा।
ये लो ले जाओ इन सब को जलवा दो ।
राजीव कुमार
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