Wednesday, May 17, 2017

बुरी आदत से मुक्ती मिल गयी तो !

गजल 😂😂😂😂

बुरी आदत से मुक्ती मिल गयी तो !
तेरी यादों से छुट्टी मिल गयी तो !

बहुत चाहा कि तुझको खत लिखूं पर
तेरे बापू को चिट्ठी मिल गयी तो !

मुझे तड़पाने वाली क्या करेगी !
मुझे तुझसे भी अच्छी मिल गयी तो !

मियां बच्चो की फिर किसको जरूरत
अगर बीवी ही छोटी मिल गयी तो !

नहीं देती है अब ससूराल जाने
उसे डर है कि साली मिल गयी तो!

मेरा ईमान तो पक्का है लेकिन
कहीं नोटो की गड्डी मिल गयी तो !

मिलेगी हर किसी को मुफ्त बोतल
अगर इस बार कुर्सी मिल गयी तो !

राजीव कुमार

No comments:

Post a Comment

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...