Wednesday, May 17, 2017

इश्क अकीदत दाम दिरम यारी का किस्सा

इश्क अकीदत दाम दिरम यारी का किस्सा।
यही है दुनियाभर की बीमारी का किस्सा ।

आग का मौसम आग की बारिस और मिरा घर।
किसे सुनाउं अपनी दुश्वारी  का किस्सा।

कहीं था रस्ता कहीं थी मंजिल और कहीं मैं
छोड़ो भी अब ऐसी लाचारी का किस्सा

मौत मुकर्रर जिस्त मुसीबत क्या अच्छा है।
मुझे पता है इस दुनियादारी का किस्सा।

मुल्क तरक्की के रस्ते है और नौजवां ।
बता रहा है अपनी बेकारी का किस्सा ।

गहरा सागर टूटी किश्ती दूर है साहिल ।
कौन सुनेगा  जंग की तैयारी का किस्सा।

खुद से जीतूं खुद को हारूं सोच रहा हूं ।
यही है मेरी मुझसे गद्दारी का किस्सा ।

राजीव कुमार

दाम दिरम -रुपया पैसा

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