बस यूं ही
दर्द जाये न शायरी जाये
जान जाती है तो चली जाये
दर्द को देख कर हसी आये
जिन्दगी इस तरह भी जी जाये
अब दिये इल्म के भी हों रौशन
अब दिलों से भी तीरगी जाये
सबके दिल को जबान दे मौला
ताकी दिल की भी अब कही जाये
अपने बेटे के फिक्र में अम्मी
देखो सरहद पे न चली जाये
आप ने एक न सुनी मेरी
क्यु भला आप की सुनी जाये
राजीव कुमार
दर्द जाये न शायरी जाये
जान जाती है तो चली जाये
दर्द को देख कर हसी आये
जिन्दगी इस तरह भी जी जाये
अब दिये इल्म के भी हों रौशन
अब दिलों से भी तीरगी जाये
सबके दिल को जबान दे मौला
ताकी दिल की भी अब कही जाये
अपने बेटे के फिक्र में अम्मी
देखो सरहद पे न चली जाये
आप ने एक न सुनी मेरी
क्यु भला आप की सुनी जाये
राजीव कुमार
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