ताजा गज़ल
दरिया सागर सहरा अम्बर क्या क्या है।
क्या बोलूं इस दिल के अन्दर क्या क्या है।
जब तक दुनियां है और दुनियादारी है।
मत पूछो दुनियां में बेहतर क्या क्या है।
कत्लो गारत झूठ ओ नफरत मक्कारी ।
अखबारों को देखो पढ कर क्या क्या है।
इक दो दिन ईमान रखो फिर समझोगे।
रोटी चावल दाल मयस्सर क्या क्या है।
इश्क की बातें हम से पूछ रहें हैं क्युं।
आखिर आपके दिल के भीतर क्या क्या है ।
उनका चेहरा उनकी आंखें और दो लब।
चाकू छूरी नश्तर खंजर क्या क्या है ।
आप की खातिर आप का राजीव देखो तो ।
आशिक पागल प्रेमी शायर क्या क्या है।
राजीव कुमार
दरिया सागर सहरा अम्बर क्या क्या है।
क्या बोलूं इस दिल के अन्दर क्या क्या है।
जब तक दुनियां है और दुनियादारी है।
मत पूछो दुनियां में बेहतर क्या क्या है।
कत्लो गारत झूठ ओ नफरत मक्कारी ।
अखबारों को देखो पढ कर क्या क्या है।
इक दो दिन ईमान रखो फिर समझोगे।
रोटी चावल दाल मयस्सर क्या क्या है।
इश्क की बातें हम से पूछ रहें हैं क्युं।
आखिर आपके दिल के भीतर क्या क्या है ।
उनका चेहरा उनकी आंखें और दो लब।
चाकू छूरी नश्तर खंजर क्या क्या है ।
आप की खातिर आप का राजीव देखो तो ।
आशिक पागल प्रेमी शायर क्या क्या है।
राजीव कुमार
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