पूछती है हूकूमत से ये मुफलिसी
हमसे क्युं दूर है अब हमारी खुशी ।
हमसे क्युं दूर है अब हमारी खुशी ।
आज दुनिया में ईमान मत पूछीये।
आज कल नाम इसका तो है बुजदिली।
आज कल नाम इसका तो है बुजदिली।
तिश्नगी जिसकी दौलत की मिटती नहीं
आज का आदमी है वही आदमी।
आज का आदमी है वही आदमी।
बाप का रुत्बा कुछ कम नहीं है मगर
मां न होती तो होती नहीं जिन्दगी ।
मां न होती तो होती नहीं जिन्दगी ।
इल्म के सब चिरागों को जिन्दा करो।
ए खुदा अब हमें चाहिये रौशनी ।
ए खुदा अब हमें चाहिये रौशनी ।
राजीव कुमार
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