Saturday, January 9, 2016

ये जो इनकार है इकरार भी हो सकता था।

दिल्ली एम्स से बैठे बैठे
ये जो इनकार है इकरार भी हो सकता था।
मुझसे मिलता तो तुझे प्यार भी हो सकता था।
जिन्दगी के सफर में साथ तेरे जाने को ।
तू बुलाता तो मैं तैयार भी हो सकता था ।
आज जिन्दादिली है दिल के जर्रे जर्रे में।
इश्क करके तो ये बेकार भी हो सकता था।
और कुछ दिन अगर ईमान लिये चलता तो ।
यार जीना मेरा दुष्वार भी हो सकता था।
दुश्मनी छोङ के इक बार तो कहता मुझसे।
तेरी खातिर मैं तेरा यार भी हो सकता था।
मेरे बस्ते में किताबें जो न रखते बाबा।
तो मेरे हाथ में हथियार भी हो सकता था।
राजीव कुमार

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