हुस्न रंगत जुल्फ शोखी नाज ओ नखरा देखकर।
छू के देखूं दिल में रख लूं तुझको चाहा देखकर।
छू के देखूं दिल में रख लूं तुझको चाहा देखकर।
रौशनी अब रात भर छत पर ही रहती हे मिरे।
चांद रुक जाता है हर शब तेरा चेहरा देखकर।
सबनमी होती है उस दिन की सुबह ए जानेजा
जागता हुं नीद से जब ख्वाब तेरा देखकर
खूब रोती हैं लिपट कर हमसे अब तनहाईयां।
थक गयीं हैं ये बेचारी तेरा रस्ता देखकर
मौत भी आती नहीं और जिन्दगी मत पूछना।
क्या करोगे रोज जीता रोज मरता देखकर
राजीव कुमार
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