अपनी शर्तों पे बात करता है
फिर भी हर बात से मुकरता है।
फिर भी हर बात से मुकरता है।
उसको दुनिया कुछ सउर नहीं।
इश्क करता है और डरता है
इश्क करता है और डरता है
हर कोई अपनी अपनी धुन में हे।
हर कोई अपनी अपनी करता है
हर कोई अपनी अपनी करता है
खूं उतर जाता है निगाहों में
जब कोई तंज तुझपे करता है
जब कोई तंज तुझपे करता है
मेरे भीतर भी एक रावण था
मेरे भीतर ही अब भी रहता है
मेरे भीतर ही अब भी रहता है
इक हमारे लिये ही जाने क्यूं
तल्ख तेवर जमाना रखता है
तल्ख तेवर जमाना रखता है
मेरी आंखों इक तेरा चेहरा
रात भर मेरे साथ रहता है
रात भर मेरे साथ रहता है
किससे फरियाद हम करें बोलो
हम गरीबों की कौन सुनता है
हम गरीबों की कौन सुनता है
अब चिरागों का कोई काम नहीं।
अब दिया मेरे दिल में जलता है
अब दिया मेरे दिल में जलता है
मौत का एक दिन मुकर्रर है।
क्यु कोई रोज रोज मरता है
क्यु कोई रोज रोज मरता है
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment