काव्योदय ग्रुप की फिलबदीह से नीकळे शेर
तुमने जो शौक से उङाया था ।
हमने मेहनत से वो कमाया था।
हमने मेहनत से वो कमाया था।
मेरे बच्चों वो दिन भी याद रहे।
हमने गुर्बत में जो बिताया था।
हमने गुर्बत में जो बिताया था।
इश्क वैसे तो बुरी बात नहीं।
फिर भी हमने इसे छुपाया था
फिर भी हमने इसे छुपाया था
तू न आया मगर तेरा साया
दूर तक साथ मेरे आया था
दूर तक साथ मेरे आया था
होश की खा रहा है गोली वो।
जिसने शिद्दत को आजमाया था
जिसने शिद्दत को आजमाया था
मयकदा मुझ तलक नहीं आया।
उसने मुझको मगर बुलाया था
उसने मुझको मगर बुलाया था
चाक किसका है गिरेबान यहां ।
दाग दामन पे किसके आया था।
दाग दामन पे किसके आया था।
याद अब तक हे वो हसीं मंजर।
हमने जो साथ में बिताया था।
हमने जो साथ में बिताया था।
राजीव कुमार
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