Saturday, January 9, 2016

मेरी हिम्मत गवाही दे रही है

ताजा गजल
मेरी हिम्मत गवाही दे रही है
तेरी ताकत दुहाई दे रही हे।
बुजूर्गों की नसीहत जिन्दगी में।
मुसलसल रहनुमाई दे रही है ।
मुहब्बत करने वालों को मुहब्बत
जमाने से लङाई दे रही है।
हुआ जब दर्द तो मां याद आई।
लगा मुझको दवाई दे रही है।
तुम्हारे वास्ते मिट्टी है लेकिन
मूझे तो मां दिखाई दे रही है
मेरी बेटी मुझे पापा बुलाकर
मुझे जैसे मिठाई दे रही है
ये कैसे रास्ते है इस शहर के।
नहीं मंजिल दिखाई दे रही है
शरीफों को मियां अब तो सराफत।
बहुत मोटी कमाई दे रही है
सुनो तूफान आयेगा कहीं पर ।
मुझे आहट सुनाई दे रही हे।
राजीव कुमार

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