Saturday, January 9, 2016

ये जो इनकार है इकरार भी हो सकता था।

दिल्ली एम्स से बैठे बैठे
ये जो इनकार है इकरार भी हो सकता था।
मुझसे मिलता तो तुझे प्यार भी हो सकता था।
जिन्दगी के सफर में साथ तेरे जाने को ।
तू बुलाता तो मैं तैयार भी हो सकता था ।
आज जिन्दादिली है दिल के जर्रे जर्रे में।
इश्क करके तो ये बेकार भी हो सकता था।
और कुछ दिन अगर ईमान लिये चलता तो ।
यार जीना मेरा दुष्वार भी हो सकता था।
दुश्मनी छोङ के इक बार तो कहता मुझसे।
तेरी खातिर मैं तेरा यार भी हो सकता था।
मेरे बस्ते में किताबें जो न रखते बाबा।
तो मेरे हाथ में हथियार भी हो सकता था।
राजीव कुमार

हर हाल में हैं खुश हमें हर हाल मुबारक

हर हाल में हैं खुश हमें हर हाल मुबारक
तुम कहते रहो चाहे नया साल मुबारक
जन्नत का मजा क्या हे ये तो आप ही समझो।
हमको तो बस हमारा नैनीताल मुबारक ।
खुद्दार मुफलिशों ने हुकूमत से कह दिया ।
हो आप को ही आप का भौकाल मुबारक।
तुम सामने बैठी रहो आंखों के और मैं।
देखा करुं ये हुस्ने बेमिसाल मुबारक ।
मेरा हर एक शेर मेरे साथ रहेगा ।
तुमको ही ये दौलत ये जर ओ माल मुबारक ।
राजीव कुमार

हुस्न रंगत जुल्फ शोखी नाज ओ नखरा देखकर

हुस्न रंगत जुल्फ शोखी नाज ओ नखरा देखकर।
छू के देखूं दिल में रख लूं तुझको चाहा देखकर।


रौशनी अब रात भर छत पर ही रहती हे मिरे।
चांद रुक जाता है हर शब तेरा चेहरा देखकर।

सबनमी होती है उस दिन की सुबह ए जानेजा
जागता हुं नीद से जब ख्वाब तेरा देखकर

खूब रोती हैं लिपट कर हमसे अब तनहाईयां।
थक गयीं हैं ये बेचारी तेरा रस्ता देखकर

मौत भी आती नहीं और जिन्दगी मत पूछना।
क्या करोगे रोज जीता रोज मरता देखकर

राजीव कुमार

मुलाकातों का ऐसा सिलसिला हो।

मुलाकातों का ऐसा सिलसिला हो।
के मुश्किल से भी मुश्किल फैसला हो।
हिमायत दुश्मनी की करने वाला ।
न मैं , न तू , न कोई दूसरा हो
बहुत खूं बह चुका है दोनो जानिब ।
कोई रिस्ता भी अब तो प्यार का हो
मिटा कर अब जहन से तल्खियों को
रकीबों से चलो अब राबिता हो।
सियासत छोङ कर मैं आ तो जाउं
मगर तुझमें भी ऐसा हौसला हो।
राजीव कुमार

कोई वादा अपना आप निभाओ तो।

कोई वादा अपना आप निभाओ तो।
कब आयेगा काळा धन बतलाओ तो
बन जाना भगवान किसानों के चाचा।
दाम फसल का ढेङ गुना दिलवाओ तो।
ना खाउंगा और ना ही खाने दुंगा ।
कितनी झूठी बात है ये समझाओ तो।
भाषण सुनने हम भी लंदन आयेंगे।
भाङे पर हमको भी ले कर जाओ तो।
राम लला के नाम पे धन्धा बहुत हुआ ।
राम लला के मंदिर को बनवाओ तो।
टू जी थ्री जी जितना तुम चिल्लाते थे
व्यापम व्यापम उतना ही चिल्लाओ तो
अच्छी अच्छी बात चलो अब करते हैं।
अच्छे अच्छे जुमले आप सुनाओ तो।
राजीव कुमार

इश्क जब सर सवार होता है

फिलबदीह 198
इश्क जब सर सवार होता है
तब कहां इन्तेजार होता हे।
प्यार हमको भी यार होता है
हर किसी को बुखार होता है
जहनों दिल में करार होता है।
जब ख्यालों में यार होता है
इन दवाओं से कुछ नहीं होता।
जब कभी दिल बीमार होता है।
तेरी नजरों की जेल में जा कर
कौन कैदी फरार होता हे ।
आप के दम से हो गया बाईस ।
वरना दो और दो चार होता है
इस जहां में ईमान वालो का।
हल्का फुल्का पगार होता है।
डांट फटकार तो हैं बाबा के।
मां का गुस्सा दूलार होता है।
राजीव कुमार

मेरी हिम्मत गवाही दे रही है

ताजा गजल
मेरी हिम्मत गवाही दे रही है
तेरी ताकत दुहाई दे रही हे।
बुजूर्गों की नसीहत जिन्दगी में।
मुसलसल रहनुमाई दे रही है ।
मुहब्बत करने वालों को मुहब्बत
जमाने से लङाई दे रही है।
हुआ जब दर्द तो मां याद आई।
लगा मुझको दवाई दे रही है।
तुम्हारे वास्ते मिट्टी है लेकिन
मूझे तो मां दिखाई दे रही है
मेरी बेटी मुझे पापा बुलाकर
मुझे जैसे मिठाई दे रही है
ये कैसे रास्ते है इस शहर के।
नहीं मंजिल दिखाई दे रही है
शरीफों को मियां अब तो सराफत।
बहुत मोटी कमाई दे रही है
सुनो तूफान आयेगा कहीं पर ।
मुझे आहट सुनाई दे रही हे।
राजीव कुमार

पूछती है हूकूमत से ये मुफलिसी

पूछती है हूकूमत से ये मुफलिसी
हमसे क्युं दूर है अब हमारी खुशी ।
आज दुनिया में ईमान मत पूछीये।
आज कल नाम इसका तो है बुजदिली।
तिश्नगी जिसकी दौलत की मिटती नहीं
आज का आदमी है वही आदमी।
बाप का रुत्बा कुछ कम नहीं है मगर
मां न होती तो होती नहीं जिन्दगी ।
इल्म के सब चिरागों को जिन्दा करो।
ए खुदा अब हमें चाहिये रौशनी ।
राजीव कुमार

जान भी आप की रूह भी आप की ।

जान भी आप की रूह भी आप की ।
आपकी की ही तो है अब मेरी जिन्दगी।
अच्छा लगता नहीं था हमें कोई गम
मिल न पायी थी जबतक गमे आशिकी ।
रश्क हो चांद को आप से क्युं नहीं ।
आप के सामने कुछ नहीं चादनी ।
राजीव

तू मेरे सामने चली आयी ।

तू मेरे सामने चली आयी ।
मैने सोचा कि जिन्दगी आयी।
पहले आई थी इस जमीं पर तू
फिर तेरे बाद शायरी आयी ।
ऐसा लगता है इन निगांहों से।
सारी दुनियां को मयकशी आयी ।
तू न आयी थी रात को लेकिन
तेरी यादों की रौशनी आयी ।
देख कर तेरे इन लबों को ही।
जैसे फूलों को ताजगी आयी।
छोङ कर जबसे तुम गयी जाना।
घर मेरे फिर नहीं खुशी आयी ।
राजीव कुमार

अपनी शर्तों पे बात करता है

अपनी शर्तों पे बात करता है
फिर भी हर बात से मुकरता है।
उसको दुनिया कुछ सउर नहीं।
इश्क करता है और डरता है
हर कोई अपनी अपनी धुन में हे।
हर कोई अपनी अपनी करता है
खूं उतर जाता है निगाहों में
जब कोई तंज तुझपे करता है
मेरे भीतर भी एक रावण था
मेरे भीतर ही अब भी रहता है
इक हमारे लिये ही जाने क्यूं
तल्ख तेवर जमाना रखता है
मेरी आंखों इक तेरा चेहरा
रात भर मेरे साथ रहता है
किससे फरियाद हम करें बोलो
हम गरीबों की कौन सुनता है
अब चिरागों का कोई काम नहीं।
अब दिया मेरे दिल में जलता है
मौत का एक दिन मुकर्रर है।
क्यु कोई रोज रोज मरता है
राजीव कुमार

तुमने जो शौक से उङाया था ।

काव्योदय ग्रुप की फिलबदीह से नीकळे शेर
तुमने जो शौक से उङाया था ।
हमने मेहनत से वो कमाया था।
मेरे बच्चों वो दिन भी याद रहे।
हमने गुर्बत में जो बिताया था।
इश्क वैसे तो बुरी बात नहीं।
फिर भी हमने इसे छुपाया था
तू न आया मगर तेरा साया
दूर तक साथ मेरे आया था
होश की खा रहा है गोली वो।
जिसने शिद्दत को आजमाया था
मयकदा मुझ तलक नहीं आया।
उसने मुझको मगर बुलाया था
चाक किसका है गिरेबान यहां ।
दाग दामन पे किसके आया था।
याद अब तक हे वो हसीं मंजर।
हमने जो साथ में बिताया था।
राजीव कुमार

इश्क वालों की हकीकत देखना ।

इश्क वालों की हकीकत देखना ।
दिल की दुनिया में तिजारत देखना।
मैं मिरे हालात से वाकिफ ही हुं ।
तू मगर अपनी तबियत देखना ।
बोलते है आप सच इस दौर में ।
आप को होगी मुसीबत देखना।
कत्ल की साजिश में शामिल था वही ।
कर रहा हैं जो हूकूमत देखना।
रात भर जगती हैं आंखें आप की ।
अपनी आखों पर अजीयत देखना।
जेब में वैसे तो अपने कुछ नहीं ।
पर कभी इस दिल की दौलत देखना।
में तेरे काबिल न था ये सच नहीं।
तू कभी अपनी हकीकत देखना।
अच्छा तो फिर शुक्रिया चलता हुं मैं।
हो गया हे वक्ते रुख्सत देखना ।
अजीयत -- यातना
राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...