Thursday, March 16, 2023

पहले पहल मुसीबत हमला‌ करती है

ग़ज़ल 

पहले पहल मुसीबत हमला‌ करती है 
फिर देखो ये हिम्मत क्या क्या करती है

अपनी मेहनत से जो राह बनाते हैं
उनके आगे किस्मत सजदा करती है

चोरी चुपके इश्क किया हमने फिर भी
बात हमारी सारी दुनिया करती है

बस ये सोच के मैंने उसको माफ किया 
नफरत सिर्फ अजीयत पैदा करती है

जंगल हो या सोने की लंका यारो
आग से हर इक शय जल जाया करती है

वनवासी जो राजा बनता है उसकी
दुनिया युगों युगों तक पूजा करती है

राजीव कुमार 🙏🏻❤️

बात बात पर मुझसे रूठा करती है

बात बात पर मुझसे रूठा करती है 
फिर भी हसते हसते झगड़ा करती है

कोलेज के केन्टीन में बैठ के घंटों तक
मेरी आंख में खुद को देखा करती है

मत पूछो वो कितनी पागल है लड़की
मेरी जान का मुझसे सौदा करती है

काल सहेली को दिन भर करती है पर 
मैसेज मुझको इक्का दुक्का करती है

खामोशियां जब भी घेरती हैं मुझको
जहन में तब वो आ के हल्ला करती है

लिपट के रोने लगती है वो ये कह के
मां मेरी शादी का चर्चा करती है

ग़ज़ल वो नेमत है जो दिल की बातों को
कहने में आसानी पैदा करती है

राजीव कुमार

Tuesday, February 7, 2023

गांव के खुश्बू भूल के गर्दा शहर के फांके आइल बा

भोजपुरी ग़ज़ल 

गांव के खुश्बू भूल के गर्दा शहर के फांके आइल बा 
असली दौलत छोड़ के नकली माल कमाये आइल बा

माई के हाथ के लिट्टी चोखा सत्तू ठेकुआ छोड़ के अब
केतना लोग शहर में छुछे रोटी खाये आइल बा

खेत बगईचा इनरा पोखर महुआ गूलर सरसों धान
जब्बो आंख मुदाइल आंख में सपना इहे आइल बा।

पहिला प्यार भइल जेकरा से अब्बो गांव में बीया ऊ
लोग दवाई छोड़ के शहर  दर्द बढ़ावे आइल बा

चांद सितारा जुगनू बारिस सगरो पिंक लिफाफा में 
रख के भेजs ले बीया बुचिया डाकीया लेके आइल बा

याद त होखबे कsरी तहके सावन के पहिला बरसात। 
माई कहे दे खs धरती पर बादर घुम्मे आइल बा

मंज़िल सामने बाटे तब्बो बइठ के सोचत बानी हम 
हमरे जइसे आखिर केतना लोग इहां ले आइल बा

गांव से शsहर जाये वाली ट्रेन प चढ़ते लागेला 
आत्मा पीछे छूट गइल बा देह अकेले आइल बा

राजीव कुमार

क्या मंच से बोला है सुना करिये सामईन कवियों पे नज़र आप रखा करिये सामईन

सामईन (श्रोतागण) कृपया ध्यान दें 

क्या मंच से बोला है सुना करिये सामईन 
कवियों पे नज़र आप रखा करिये सामईन

ये चाहते हैं भूख कजा मुफ्लिसी  को भूल।
जय जय किसी की आप सदा करिये सामईन

जो शेर कह रहे है वो सब जुल्म से डर के
आखिर कहां छुपे है पता करिये सामईन

कुछ भी सुना के चल दें तो मत दाद दीजीए
उंगली उठा के इन पे हंसा करिये सामईन

अपने ही दिल की लिख रहे हैं पढ़ रहे हैं सब 
ऐसे में आप अपनी कहा करिये सामईन

लोगो का जो नहीं है वो गीतों के हैं कहां 
ये भी सवाल दिल  में रखा करिये सामईन

जिनको न कोई शर्म है न फिक्र आप की
उन साहिबे अदब से बचा करिये सामईन

जो हक में आप ही के नहीं उनपे आप भी
गर हो सके तो सख्त रहा करिये सामईन

राजीव कुमार

प्रेम हर काम से जरूरी हsप्रेम के नाम भोजपूरी हs

भोजपुरीया ग़ज़ल (प्रेम)

प्रेम  हर  काम  से  जरूरी हs
प्रेम  के   नाम  भोजपूरी   हs

माई  बाबू आ  भइया भाभी के 
प्रेम   हलुवा हs अउर पूरी हs

रूह  से  प्रेम   एगो  पूजा  हs
देह   से  प्रेम  दिल के दूरी हs

जिद प आये त प्रेम आफत हs
दिल  में  रहे त जग के नूरी हs

जे समाइल बा मन में उनके से
सबके किस्मत में काहे  दूरी हs

प्रेम  मरहम हs केहू खातिर तs
प्रेम  कांटा  हs  प्रेम  छूरी  हs

प्रेम आशिक के सगरो दौलत हs  
प्रेम शायर के  बस   मजूरी हs

काम से प्रेम होला तप बाकिर
बोस  से   प्रेम   जी  हूजूरी हs

केहू  माने   न  माने  हमनी  के  
प्रेम जिनगी के असली धूरी हs

राजीव कुमार

चोरी डकैती लूट बलात्कार देख लीं

भोजपुरी ग़ज़ल
देख लीं 😊

चोरी डकैती लूट बलात्कार देख लीं
केतना अजीब बाटे इ संसार देख लीं

टोपी जनेउ दाड़ी आ दस्तार देख लीं 
भारत में भेद भाव के हथियार देख लीं

हमनीं के हाल आईं ना सरकार देख लीं
छाती प चढ़ गईल बा एगो थार देख लीं

हारल बा जे अब उनकरो सरकार देख लीं
होखेला अइसनो भी चमत्कार देख लीं

कमजोर आदमी प राउर टेड़ बा नजर 
कहियो त ओही आंख से बरियार देख लीं

मरले बा जवन जान से उहे करत बा न्याय
बा अइसनो इहां प गुनहगार देख लीं

एतना भईल विकास कि ए देश में हूजूर
लइका हर एगो घर में बा बेकार देख लीं

माई के हाल पहिले से ज्यादा खराब बा
गंगा के एह पार से ओह पार देख लीं

पेंसिल किताब बस्ता पढ़ाई के छोड़ के
चाकू में अब लगाव तनी धार देख लीं

भगवान जी अब हाथ खड़ा कर लेले बाड़न
देखे के बा त आज के अखबार देख लीं

R kumar

प्रेम ए दुनिया में जे कsरी ई उनके ईनाम मिली

भोजपुरी ग़ज़ल 

प्रेम  ए   दुनिया   में  जे कsरी   ई   उनके  ईनाम  मिली 
जेतना   बदनामी   ऊ पइहन ओतने  उनके  नाम  मिली

प्यार करे से पहिले  ई हो  सोच  ल‌  का  अन्जाम  मिली
दिन भर  दिल  बे  चैन रही आ  रात में ना आराम मिली 

जान  के  कवनो  कीमत नइखे देह के दुनिया में बाकिर 
तब्बो  दिल के जिस्म से बेसी इश्क में तहके दाम मिली

सूरज  जइसे  उग  के  उनकर  सपना  भोर  में  कहेला 
प्रेम  के  सागर में  डुबला  के   बादे  सुन्दर  शाम मिली

एक  दूजे  के  पा  जइला  के  पागल  पन से ना पइ बा 
कहियो खुद के छोड़ के दे खs तोहरे दिल में राम मिली

दिन भर  आपन  के बोझ उठाई  रात में  रोई अपने पर 
जे-जे  आपन  प्यार  न  पाई उनका  के  ई  काम मिली

ऊहो वक्त रहे जब क्लास में बइठ के सोचीं घsरे आज 
खीर में गोला  किशमिश काजू अउर तनी बादाम मिली

मेहनत  से  जे   काम   करेला   उनकर कमवा बोले ला 
बाकी  जे नाकाम  बा तोहके उनकर जिभिया लाम मिली 

सूर   कबीर   भिखारी  ग़ालिब  ईहे  लिखले  बा सsभे।
दर्द  ग़ज़ल  में जेतना  लिख  ब ओतने ही आराम मिली

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...