Thursday, June 30, 2022
गीत काहें मन बइठल बाटे
Thursday, June 16, 2022
धान के रोपनी आम के मौसम घर के याद सताये ला।
सच कहीं बोल दीं? बो ल ना बताव हमके
खतम भईल अब हमनी के
Monday, April 11, 2022
महब्बत क्रीमनलाईज कर रहे हैं
हज़ल हास्य रस 😊😊🙏🙏
महब्बत क्रीमनलाईज कर रहे हैं
डकैती मोर्डनाईज कर रहे हैं
था कल तक जुर्म लेकिन आज से हम
कीमशन लीगलाईज कर रहे हैं
बचाने वाले ही अब रेप करना
मुसलसल नोर्मलाईज कर रहे हैं
खबर के नाम पर ये न्युज चैनल
किसी की एडवटाईज कर रहे हैं
सफाई हाथ की जो कर चुके वो
सभी को सेनीटाईज कर रहे हैं।
ये चंदा मांगने वाले अभी भी
हमें डीमोनीटाईज कर रहे है
हमारी ग्रोथ है गढ्ढे में लेकिन
हमारे सेठ राईज कर रहे हैं
बस इक खेती किसानी थी हमारी
उसे भी प्राइवेटाईज कर रहे हैं
मुतास्सिर होके उससे हम भी अपना
एडेण्डा फाईनलाईज कर रहे हैं
बदन तो ठीक है पर अक्ल का हम
दिनों दिन हाफ साईज कर रहे है
राजीव कुमार
हर तरफ शोर है नफ़रत है तबाही है दोस्त
हर तरफ शोर है नफ़रत है तबाही है दोस्त
अब कहाँ इश्क़ ज़माने में बचा ही है दोस्त।
तेरे बारे में नहीं बोल रहा हूँ फिर भी
मेरी हालत तेरे ज़ुल्मों की गवाही है दोस्त
कौन से सच की तरफ भाग रहा हूँ मैं भी
मेरे पीछे भी मेरा झूठ पङा ही है दोस्त
बात अच्छी है बुरी है नहीं मालूम मगर
इश्क़ हर शख़्स को इक बार हुआ ही है दोस्त
इन महब्बत के सताये हुए लोगों के लिये
दर्द ये दर्द नहीं है ये दवा ही है दोस्त
कैसे पायेंगे तरक़्क़ी का वो अमृत हम लोग
दिल में जब जह्र अदावत का भरा ही है दोस्त
बात इतनी है कि ईमान परस्तों के लिये।
आज का दौर भी इक सख़्त सजा ही है दोस्त
जिन्दगी एक सफर है तो मुझे लगता है
मौत मंजिल नहीं दर अस्ल ये राही है दोस्त
जिसमें मजलूम की आवाज नहीं है शामिल
शेर वो शेर नहीं सिर्फ सियाही है दोस्त
राजीव कुमार
हसरत जब रुख्सार से बातें करती है
ग़ज़ल
हसरत जब रुख्सार से बातें करती है
बीनाई दीदार से बातें करती है
एक यही अंदाज जुदा है बस उसका
रूठ के भी वो प्यार से बातें करती है
दो दिन घर में तन्हा रह कर जान गया
खिङकी भी दीवार से बातें करती है
इश्क़ कहां होता है सच्चा जानते हो?
रूह जहां किरदार से बातें करती है
दरिया के तूफान से वो क्युं डर जाये
जो कश्ती मंझधार से बातें करती है
जीवन के इस रेस में हमने देखा है
मौत सदा रफ्तार से बातें करती है
राजीव कुमार
सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।
ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...
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ग़ज़ल जबसे दिल में उतर गयी गंगा मैल सब मन के हर गयी गंगा घर से निकला तो मां की आंखों में मैने देखा बिखर गयी गंगा। सिर्फ पानी नहीं य...
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कोई वादा अपना आप निभाओ तो। कब आयेगा काळा धन बतलाओ तो बन जाना भगवान किसानों के चाचा। दाम फसल का ढेङ गुना दिलवाओ तो। ना खाउंगा और ना ही...
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भोजपुरी ग़ज़ल सीधा रास्ता छोड़ के टेड़े राह चलेलन राजीव जी प्रेम करेलन दर्द सहेलन मस्त रहेलन राजीव जी जेब त खाली बाटे बाकिर अपने दि...