Thursday, June 30, 2022

गीत काहें मन बइठल बाटे

काहें मन बइठल बाटे 
कइसे दिल टूटल बाटे
काहें इ किस्मत आखिर 
तोहरा से रूठल बाटे 

दिल के लगा ल हमसे 
हमके चोरा हमसे 
हमरे आखीं मे दे ख 
सब कुछ बता द हमसे 
सब भुला के आजा प्यार क रे के 
जान से भी ज्यादा प्यार क रे के 

दरिया के धारा हटे
कवनो किनारा हटे
जिनगी ई जिनगी ना ह 
टूटल सितारा हटे 

रात अजोरा रही 
नश्शा भी पूरा रही 
तहार कवनो ना इंहवा 
चाहत अधूरा रही 
सब भुला के आजा प्यार क रे के 
जान से भी ज्यादा प्यार क रे के 

सांस रही जहिया ले
दुखो रही तहिया ले
केतना जी आजिज होई
अउरी होई कहिया ले 

माचिस लगा द गम के 
लगे बोलाल हम के
चाहत के सावन में अब
बिजली चमके त चमके

सब भुला के आजा प्यार क रे के 
जान से भी ज्यादा प्यार क रे के 

राजीव कुमार

Thursday, June 16, 2022

धान के रोपनी आम के मौसम घर के याद सताये ला।

भोजपुरी ग़ज़ल (बिरहा)

धान के रोपनी  आम के मौसम घर के याद सताये ला।
बिछड़ के सबसे रातो  दिन अब मनवा बिरहा गाये ला।

गांव से बाहर  निकले  खातिर सपना देखले रहनी हम।
अब जब शहर में आ गईनी त गांव के सपना आये ला।

माई  के  अंचरा  के  छाया  में  धूप   में  भी  ठंडा  लागे।
आज  मगर  ए सी  दफ्तर  में  बइठ के जी घबराये ला।

साईकिल छोड़ के कार चलावे लगनी लेकिन आजो ले।
हमरे   दिल   में  एगो   लइका  कैंची  रोज  चलाये  ला।

दोस्त संघतिया  सब  चल  गईलें  अपने अपने जीवन में।
लेकिन  अब्बो  खेले  खातिर  फिल्ड  में मनवा जाये ला।

वक्त  गुजर  जायेला  लेकिन  स्वाद  कबो  नाहीं  जाला।
भूजा  सत्तू   लिट्टी   चोखा   खाये के मन  ललचाये  ला।

दिन  भर  मस्ती  सांझ  के खेला रात के छत पे सुत्ते के।
लेकिन  अब   ई  हाल  बा  राजू  नींद के गोली खायेला।

राजीव कुमार

कैंची- बच्चे जब पहली बार अपने से बड़ी साईकिल चलाना सीखते है।

भोजपुरी ग़ज़ल की महफ़िल 
पूरा सुनने के लिए लिंक चटकायें
https://youtu.be/Xgw-izHLbzM

सच कहीं बोल दीं? बो ल ना बताव हमके

भोजपुरी ग़ज़ल

सच कहीं बोल दीं? बो ल ना बताव हमके
भेद सब खोल दीं ?बो ल ना बताव हमके

 हमरे जिनगी के कहानी के फिलम में रानी
तहरो के रोल दीं ?बो ल ना बताव हमके

सोना चांदी त ह माटी तू क ह त दिल से
तोहके हम तोल दीं? बो ल ना बताव हमके

होठ मिसरी ह तोहार जेके ग़ज़ल में अपने
चूम के घोल दीं? बो ल ना बताव हमके

दिल में तोहरे बा जवन बात ऊ पता हमके बा
तू क ह बोल दीं ?बो ल ना बताव हमके

राजीव कुमार

खतम भईल अब हमनी के

भोजपुरी गीत

खतम भईल अब हमनी के
जानेमन इन्तजार 
बहियां में तू आ गईलू त 
आ गईल बा बहार 


जब जब खुले इ अंखिया 
तब सामने तू र ह 
जब होखे यार रतिया।
सपना मे तू ही आ व 

अइसे चले ज़िन्दगी 

ए बाबू सोना बेबी 
आ जा ना प्यार करी

तोहरा से अब दूर हम होके ना जी सकम
हमरे हर इक सांस में बा नाम तोहरे सनम 

बगीया के फूल जइसे 
चंदा के रूप जइसे 
तू जिनगी मे अब र ह 
सुबह के धूप जइसे 

साथ न छूटे कभी  

ए बाबू सोना बेबी 
आ जा ना प्यार करी

दुनिया भर के खुशी तोहरा खातिर रही
हर एक पल जिन्दगी तोहरा खातिर रही
सुबह आ  शाम तोहरे
चाहत के नाम तोहरे 
अपने ही मन के ह पर 
ह दिल गुलाम तहरे 

जान *जाई* या रही 

ए बाबू सोना बेबी
आ जा ना प्यार करीं

राजीव कुमार

Monday, April 11, 2022

महब्बत क्रीमनलाईज कर रहे हैं

 हज़ल हास्य रस 😊😊🙏🙏


महब्बत क्रीमनलाईज कर रहे हैं

डकैती  मोर्डनाईज   कर  रहे  हैं  


था कल तक जुर्म लेकिन आज से हम

कीमशन लीगलाईज  कर  रहे हैं 


बचाने  वाले ही  अब  रेप करना  

मुसलसल नोर्मलाईज कर रहे हैं


खबर के  नाम पर ये न्युज चैनल 

किसी की  एडवटाईज कर रहे हैं


सफाई हाथ की जो कर चुके वो

सभी को  सेनीटाईज  कर रहे हैं।


ये  चंदा    मांगने  वाले अभी भी

हमें  डीमोनीटाईज   कर  रहे  है 


हमारी  ग्रोथ  है  गढ्ढे  में  लेकिन 

हमारे   सेठ  राईज  कर  रहे  हैं 


बस इक खेती किसानी थी हमारी 

उसे भी  प्राइवेटाईज  कर रहे हैं 


मुतास्सिर होके उससे हम भी अपना 

एडेण्डा  फाईनलाईज कर रहे हैं


बदन तो ठीक है पर अक्ल का हम

दिनों दिन हाफ साईज कर रहे है


राजीव कुमार

हर तरफ शोर है नफ़रत है तबाही है दोस्त

 हर तरफ शोर है नफ़रत है तबाही है दोस्त  

अब कहाँ इश्क़ ज़माने में बचा ही है दोस्त।


तेरे बारे में नहीं बोल रहा हूँ फिर भी 

मेरी हालत तेरे ज़ुल्मों की गवाही है दोस्त


कौन से सच की तरफ भाग रहा हूँ मैं भी

मेरे पीछे भी मेरा झूठ पङा ही है दोस्त


बात अच्छी है बुरी है नहीं मालूम मगर 

इश्क़ हर शख़्स को इक बार हुआ ही है दोस्त


इन महब्बत के सताये हुए लोगों के लिये 

दर्द  ये दर्द  नहीं है ये दवा ही है दोस्त


कैसे पायेंगे तरक़्क़ी का वो अमृत हम लोग

दिल में जब जह्र अदावत का भरा ही है दोस्त


बात इतनी है कि ईमान परस्तों के लिये।

आज का दौर भी इक सख़्त सजा ही है दोस्त


जिन्दगी एक सफर है तो मुझे लगता है 

मौत मंजिल नहीं दर अस्ल ये राही है दोस्त


जिसमें मजलूम की आवाज नहीं है शामिल

शेर वो शेर नहीं सिर्फ सियाही  है दोस्त 


राजीव कुमार



हसरत जब रुख्सार से बातें करती है

 ग़ज़ल


हसरत जब रुख्सार से बातें करती है 

बीनाई   दीदार   से   बातें  करती  है


एक यही अंदाज जुदा है बस उसका

रूठ के भी वो प्यार से बातें करती है


दो दिन घर में तन्हा रह कर जान गया

खिङकी  भी  दीवार से बातें करती है 


इश्क़ कहां होता है सच्चा जानते हो?

रूह जहां  किरदार  से बातें करती है


दरिया के तूफान से  वो  क्युं डर  जाये 

जो  कश्ती  मंझधार  से  बातें करती है


जीवन  के  इस  रेस  में हमने देखा है

मौत  सदा  रफ्तार  से  बातें  करती है


राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...