Tuesday, August 5, 2014

कोई आवाज़ दे दे कर बुलाता है बुलाने दो /


ग़ज़ल की एक कोशिस ______

कोई आवाज़ दे दे कर बुलाता है बुलाने दो /
जुदा होना ही है गर तो जुदाई हो ही जाने दो/

दिवाने दिल को समझाना दिवाने जान लेते है /
जो रोते हैं मोहब्बत में उन्हें रोने दो गाने दो/

जो करना है करेंगे हम किसी से हम नहीं डरते /
कोई जालिम जमाने को बताता है बताने दो/

कभी गर्दिश कभी गुर्बत कभी अंजाम का खतरा /
मिया तुमसे नहीं होगा हमे ही दिल लगाने दो/

नहीं पाते है मंजिल जो फकत रस्ते पे बैठे है /
हमे चलना है रस्ते पर हमे रास्ता बनाने दो/

यहाँ पर कौन है सच्चा खता हर एक करता है /
है उंगली उसके जानिब भी उसे ऊँगली उठाने दो/

बिना नाकामियों के कामयाबी का मजा क्या है /
है लज्जत गिर की उठने में हमे भी आजमाने दो /

राजीव कुमार

Friday, July 25, 2014

फकत आजाद होने की गुजारिश कर रहा हूँ।

फकत आजाद होने की गुजारिश कर रहा हूँ।
मै सय्यादों से चिङियों की सिफारिश कर रहा हूँ ।

सियासत से उगा देता हूँ बंजर खेत में फसलें ।
किसानो मै हूकूमत हूँ मै बारिस कर रहा हूँ ।

राजीव

शहर ए उल्फत के बदनाम मुहल्लों में रहा।

शहर ए उल्फत के बदनाम मुहल्लों में रहा।
सच्चा आशिक था मगर नाम निठल्लों में रहा।

हुस्न को दे के नवाजा था हमनें हुस्ने नजर।
कोई पूछे क्यु गूरूर उनका दूतल्लों में रहा ।

लोग कैसे जाने ये इश्क छुपा लेते है।
इश्क मेरा तो जमाने के हूहल्लो में रहा।

राजीव कुमार

फ़क़ीर है बड़ा वो सबका रहनुमा भी है/

फ़क़ीर है बड़ा वो सबका रहनुमा भी है/
ख़ुदा कभी नहीं कहता की वो ख़ुदा भी है/

उसे जो देखना चाहो तो ये जहाँ देखो ,
वही है फूल की खुसबू में वो फ़िज़ा भी है/

दिलों में पाक मोहब्बत की दास्ताँ है वो , 
वही तो इश्क़ में जिन्दा है वो वफ़ा भी है/ 

हर एक शक्स है सफर पे बेखबर लेकिन,
किसी का रास्ता किसी का हमनवां भी है

अगर हो दर्द तो रहता है वो दवा की तरह ,
हर एक साँस में चलता है वो हवा भी है

राजीव कुमार

वो दिन को रात बनाने का हुनर रखता है।

वो दिन को रात बनाने का हुनर रखता है।
खुदा ही है जो सितारों को अमर रखता है।

बिना कहे भी सदा दिल की सुन रहा है वो।
हर इक निगाह में अश्कों की खबर रखता है।

शजर पे बैठा है वो एक परिन्दे की तरह ।
वही तो जुगनु में दिये सा असर रखता है।

कुएं मे किसकी नेकीयां है ये पता है उसे।
वो इस तरह के हर कूंएं पे नजर रखता है।

कभी तो हमको मिलेगा खुदा कहीं न कहीं
यही तो सोच के बसर भी सफर रखता है।

गजल ये मेरी नहीं है उसी की है यारों।
वही तो इश्क कलमों में बहर रखता है।

राजीव कुमार

वो खयाल आंखो मे रात दिन कोई ख्वाब बन के अभी भी है।

दोस्तो ये गजल आप सभी के हवाले ----------

वो खयाल आंखो मे रात दिन कोई ख्वाब बन के अभी भी है।
वो जो आग सीने में थी कभी, वो चिराग बन के अभी भी है

जहां बारिसों का न नाम था जहां रेत उङती थी हर जगह॥
उसी दिल में जब से रहे हो तुम, वो गुलाब बन के अभी भी है

कहां दर्द कितना मिला मुझे कहां कुछ भी मुझको मिला नहीं।
ये हसीन किस्सा है प्यार का जो हिसाब बन के अभी भी है ॥

कभी दिल्लगी के लिहाज से कोई वक्त मुझको भी दिजिये।
मेरी महफिलें में गजल नहीं वो शराब बन के अभी भी है॥

मेरा हाल ए दिल मेरी हर ग़ज़ल मेरी जिन्दगी के हसीन पल॥
मैं नया लिखुं भी तो क्या लिखुं वो किताब बन के अभी भी है।

राजीव कुमार

Tuesday, July 1, 2014

बहुत से शायरों को सबसे पहले आजमाया था ।



बहुत से शायरों को सबसे पहले आजमाया था ।
गजल की इस हसीं बस्ती को तब हमने बसाया था ॥

शरीफों को या चोरों को तवज्जो सब को दी हमने।
किसी ने दिल दुखाया था किसी ने दिल चुराया था॥

गजल की सल्तनत पर कुछ हूकुमत का थे दम भरते॥
उन्हे मतले का मतलब भी हमी ने ही बताया था॥

हां ये भी सच है कि कुछ तो खता हमसे हुई होगी ।
मगर यारों खताओं ने ही तो हमको सिखाया था ।

गजल कहना हमेशा ही रहा है खेल लफ्जों का ।
किसी ने गुनगुनाया था किसी ने बस सुनाया थया

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...